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अपर सत्र न्यायाधीश (उत्तर प्रदेश गिरोह बंद समाज विरोधी क्रिया कलाप अधिनियम) लोकेश राय की अदालत ने गैंगेस्टर के अपराध में दोषी चार अपराधियों को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यही नहीं पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
आठ वर्ष पूर्व कोतवाली प्रभारी महरौनी सुरेश बाबू ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 अप्रैल 2008 को वह कांस्टेबल हरीशंकर, रतन सिंह, के साथ सुबह करीब साढ़े नौ बजे थाना क्षेत्र में गश्त पर थे। ग्राम खितवांस व आसपास के गांव के लोगों ने बताया कि गांव के ही अभियुक्त महेंद्र सिंह का एक संगठित गिरोह है। गैंग में गांव का वीरेंद्र सिंह, पूरन सिंह व थाना जाखलौन अंतर्गत ग्राम बंदरगुढ़ा निवासी आधार सिंह सक्रिय सदस्य हैं। वर्तमान में पूरा गिरोह हत्या, हत्या के प्रयास, आयुध अधिनियम में जिला कारागार में बंद है। जो भी इनसे मिलने जाता है, उनसे मुकदमा लड़ने के लिए रुपयों का इंतजाम करने का संदेशा भिजवाया जाता है। गुप्त रुप से संदेश दिया जाता है। धन न देने पर जान से मारने व देख लेने की धमकी दी जाती है। गैंगेस्टर एक्ट में मुकदमा दर्ज किया गया।
उक्त मामले में न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए। सोमवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गईं दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अभियुक्त महेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, पूरन सिंह व आधार सिंह को पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन की ओर से पैरवी ज्येष्ठ अभियोजन अधिकारी रामनरेश सिंह ने की।