खातीपाड़ा में विवाद तो था, मगर ऐसा नहीं जिसका समाधान न हो। पुलिस चाहती तो बात इतनी बिगड़ती ही नहीं लेकिन थाना पुलिस ने इसे हल्के में लिया। नतीजा यह रहा कि मामला बिगड़ता चला गया। पुलिस इसे बातों से दबाने में लगी रही। इसके चलते रात में बवाल हो गया। अगर मंदिर पर सुबह ही पुलिस लगा दी गई होती तो टकराव की नौबत ही न आती। जब हालात बिगड़ गए, तब पुलिस ने लाठी बरसाईं। इसमें एक महिला को भी चोट लग गई।
खातीपाड़ा का विवाद थाना पुलिस को पिछले साल से मालूम था। इसकी पूरी फाइल थाना पर है। यह मामला प्रशासन के पास जाना चाहिए था लेकिन वहां नहीं भेजा गया। दोनों पक्षों से एक समझौतानामा लिखकर ले लिया गया कि विवाद का निस्तारण होने तक मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं की जाएगी लेकिन निस्तारण के लिए कुछ नहीं किया गया।
तहसील से जमीन का रिकार्ड मंगवाया जाता। इसे देखकर पता चलता कि जमीन किसकी है। यह भी जानकारी होती कि मंदिर कब से है। पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया। विवाद को बना रहने दिया। चिंगारी थी, उसे दबा दिया, बुझाया नहीं। जैसे ही हवा चली, चिंगारी भड़की और शोला बन गई।
दिनभर सोती रही पुलिस
1--। सुबह ही खातीपाड़ा की महिलाएं लोहामंडी थाना पहुंच गई थी, पुलिस ने उनकी सुनी ही नहीं।
2--। दोपहर को खातीपाड़ा के काफी लोग पहुंच गए, फिर भी मंदिर पर पुलिस तैनात नहीं की गई।
3--। शाम को हिंदू संगठनों ने थाना का घेराव किया, तब तक अफसरों को जानकारी नहीं दी गई।
4--। रात में सांप्रदायिक बवाल हो जाने के बाद पुलिस ने अधिकारियों को बताया।
5--। भाजपा नेताओं ने शासन तक जानकारी पहुंचा दी, तब अफसरों में हड़कंप मचा।
पुलिस पर उतरा हिंदू संगठनों का गुस्सा
आगरा। मंदिर न खुलने से हिंदू संगठनों के लोग गुस्से से भरे थे। गेट खोले जाने की कोशिश के दौरान इसे तोड़ दिया गया। इससे सटी दीवार भी टूट गई। तभी पुलिस पहुंच गई। लोग पुलिस पर पिल पड़े। सिपाहियों से हाथापाई कर डाली। इस पर पुलिस ने भी लाठी बरसाना शुरू कर दिया। इससे वहां भगदड़ मच गई।
रात में छावनी बना खातीपाड़ा
आगरा। दिन में तो पुलिस की आंख खुली नहीं। जब हालात बिगड़ गए तो पूरे इलाके को छावनी बना दिया गया। पुलिस प्रशासन के अधिकारी पहुंच गए। शहर के सभी थानों से फोर्स बुला ली गई। यूपी 100 की गाड़ियां भी लगा दी गई। विवादित स्थल पर भी पुलिस तैनात कर दी गई।
लापरवाही - 1
पुलिस ने मंदिर में ताला लगाते समय कहा कि विवाद का निस्तारण होने तक पूजा नहीं की जाएगी लेकिन मामला निपटाने के लिए कुछ किया ही नहीं।
लापरवाही - 2
आबिद का कहना है कि वह तीन बार एसडीएम के पास गया मामले का निस्तारण करने के लिए। हर बार उसे यह कहकर टरका दिया कि जल्द ही कुछ करेंगे।
लापरवाही - 3
इतना विवादित मामला होने के बावजूद पुलिस ने इससे जुड़े पक्षों के बीच कभी समझौता कराने का कोई प्रयास ही नहीं किया। इसके चलते बात बढ़ गई।
लापरवाही - 4
पिछले चैत्र नवरात्र में विवाद हुआ था। अब फिर से नवरात्र आने पर एलआईयू ने इस मामले के बारे में पुलिस प्रशासन के अफसरों को कोई रिपोर्ट नहीं दी।