एटा के जलेसर में पांच जुआरियों और एक सटोरियों को रंगेहाथ पकड़ने के बाद पुलिस ने पांच जुआरियों को थाने से जमान पर रिहा कर दिया। माना जा रहा है कि सटोरिए मनोज को बेहरमी से पीट कर अधमरा करने की अफवाह नहीं उड़ती तो जलेसर कोतवाली में उपद्रव नहीं होता।
पुलिस सूत्रों की माने तो पकड़े गए जुआरियों को थाने से रिहा कराने में भाजपाईयों ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन जिस वक्त थाने पर हमला हुआ उस वक्त कोई नहीं आया। पथराव और तोड़फोड़ होने पर थाने से पुलिस कर्मी भाग निकले। तीन मुंशी, हमराह और कोतवाल ने विरोध किया तो भीड़ के आक्रोश का शिकार होकर घायल हो गए।
जलेसर कस्बे में पुलिस की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर सट्टा और जुआ होता है। मंगलवार को पुलिस ने इस्लाम नगर इलाके से सटोरिए मनोज समेत छह जुआरियों को पकड़ा था। पुलिस सूत्रों की माने तो कोतवाली पुलिस ने बिना लिखापढ़ी के सुविधा शुल्क लेकर पांच जुआरियों को रिहा कर दिया था। बुधवार को जब कोतवाली पुलिस से जुआरियों के नाम मांगे गए तो दिनभर मानवाधिकार सचिव का निरीक्षण चलने का बहाना बनाती रही।
बाद में पता चला कि आनन-फानन में जुआरियों को सुविधा शुल्क लेकर भाजपाइयों के इशारे पर थाने से रिहा किया गया था। कोतवाली सूत्रों का दावा है कि बुधवार सुबह तक जुआरियों को छोड़ने को लेकर विवाद होने पर कोतवाली के इशारे पर जीडी रोक कर रखी गई। यही कारण है कि पुलिस थाने से रिहा हुए जुआरियों का नाम नहीं बता पा रही।