रुनकता स्थित अटूस पुल पर गुरुवार दोपहर बाइक से घर जा रहे राजस्थान पुलिस के सिपाही महेंद्र (42) और उनकी पत्नी विमला सामने से आती कार की चपेट में आ गए। हादसे के बाद कार पलट गई। घायल दंपति को अस्पताल लेकर आ रही एंबुलेंस गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूसों से लगे जाम में फंस गई। तकरीबन एक घंटे बाद उन्हें एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी लेकर आईं, जहां डाक्टरों ने सिपाही को मृत घोषित कर दिया। माना जा रहा है कि जाम में फंसने के कारण ही उनकी जान नहीं बच पाई।
गांव नूरपुर, चिकसाना, भरतपुर (राजस्थान) निवासी महेंद्र गुरुवार सुबह पनवारी अपने बहनोई उदयवीर के यहां आए थे। दोपहर 1.40 बजे वह पत्नी के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। रुनकता क्षेत्र मेें अटूस नहर स्थित फौजी ढाबा के पास सामने से स्पीड से आ रही कार की बाइक में टक्कर लगी। कार पलटकर सड़क किनारे के खेत में जा गिरी, वहीं महेंद्र और विमला गंभीर घायल हो गए।
कार में सवार चार युवक भाग गए, जबकि एक युवती को मामूली चोट आई। वहीं फौजी ढाबा के मालिक संतराम सिंह ने पुलिस कंट्रोल रूम को हादसे की सूचना दी। रुनकता स्थित स्वास्थ्य केंद्र से 108 एंबुलेंस पहुंच गई।
एंबुलेंस को बंटी चला रहा था। उसने बताया कि विसर्जन जुलूसों के कारण रुनकता-सिकंदरा मार्ग पर जाम होने की वजह से वह मलपुरा नहर होकर बिचपुरी आया। बिचपुरी फाटक पर भी प्रतिमा विसर्जन जुलूसों की वजह से जाम लगा हुआ था। बमुश्किल एंबुलेंस बोदला होते हुए एक घंटे बाद इमरजेंसी पहुंच सकी। तब तक महेंद्र की मौत हो गई। वहीं उनकी पत्नी विमला की हालत गंभीर बनी हुई है।
पूर्व फौजी की तत्परता से बची महिला की जान
पूर्व फौजी संतराम अपने होटल की पहली मंजिल पर बच्चों के साथ बैठे हुए थे। कार की टक्कर की आवाज सुनकर वह मौके पर दौड़ पड़े। संतराम ने बताया कि उनके सूचना देने पर 20 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। संतराम ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को एंबुलेंस में लिटा दिया। मदद के लिए वह अस्पताल तक घायलों के साथ ही आए। उन्होंने बताया कि अगर महेंद्र को समय पर इलाज मिल जाता तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। उनका काफी खून बह गया, जिससे उनकी मौत हो गई।