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एक करोड़ की फिरौती के लिए अपहृत युवक बीहड़ से मुक्त

Tue, 18 Aug 2015 02:02 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
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सिकंदरा क्षेत्र से 11 अगस्त को अपहृत युवक लकी को सोमवार को धौलपुर के बीहड़ से मुक्त करा लिया गया है। उसे छोड़ने के लिए बदमाश एक करोड़ की फिरौती मांग रहे थे। बाद में सौदेबाजी करते करते 30 लाख पर आ गए थे। पुलिस का कहना है कि यह अपहरण लकी के रिश्तेदार ने ही कराया था। एक अपहर्ता को दबोच लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। अपहरण करने वाले गैंग ने लकी को बाद में गट्टा गैंग के सुपुर्द कर दिया था।
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पुलिस सूत्रों ने बताया कि सिकंदर निवासी लकी को 11 अगस्त को उसका रिश्तेदार युवक घर से बुलाकर ले गया था। दोनों ने रास्ते में शराब पी। इसके बाद युवक ने अपने एक साथी को और बुला लिया। बहाने से दोनों लकी को धौलपुर ले गए। यहां पर उसे बंधक बना लिया। यहां राजस्थान के गट्टा गैंग के सुपुर्द करने की तैयारी कर ली। परिवारीजनों के पास एक करोड़ की फिरौती के लिए फोन आना शुरू हो गए। परिवारीजनों ने इतनी रकम का इंतजाम नहीं होने से इंकार कर दिया।
अपहरणकर्ताओं ने रकम न देने पर लकी हत्या की धमकी दी। इस पर परिवारीजनों ने 13 अगस्त सिकंदरा पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करके बदमाशों की तलाश शुरू कर दी। एसएसपी की स्पेशल टीम और स्वाट को लगाया गया। फिरौती राजस्थान के बीहड़ से मांगे जाने पर पुलिस टीम को वहां रवाना कर दिया गया। इस बीच परिवारीजन अपहरणकर्ताओं से फोन पर बातचीत करते रहे। फिरौती की रकम घटकर 30 लाख पर पहुंच गई।
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सोमवार दोपहर को परिवारीजन भरतपुर के सर मथुरा थाना क्षेत्र के बीहड़ में रुपये लेकर पहुंच गए। पुलिस ने भी घेराबंदी कर ली। रकम लेने आए गट्टा गैंग के सदस्य अर्जुन पंडित को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं पकड़ भी मुक्त करा ली गई। पुलिस देर रात को लकी को लेकर आने की तैयारी में थी।
प्रापर्टी को लेकर था विवाद
पुलिस की माने तो लकी का अपहरण उसके रिश्तेदार युवक ने ही कराया था। युवक से प्रापर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। वह लकी के घर के पास ही रहता है। रोजाना साथ ही रहते हैं। इस तरह पकड़ कराकर रकम वसूल करना चाहता था।
गट्टा गैंग से किया था सौदा
पुलिस सूत्रों की मानें तो गट्टा गैंग पर अगर पकड़ पहुंच जाती तो मुक्त कराना आसान नहीं होता। अभी आरोपियों ने गैंग के सदस्यों से संपर्क साधा था। इसके बाद कैरियर के माध्यम से पकड़ को बीहड़ में गैंग के सुपुर्द कर दिया जाता, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे बरामद कर लिया।
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