मैनपुरी। ब्लाक मैनपुरी के गांव लहरा एमनीपुर में पांच वर्ष पूर्व कालाबाजारी के चलते निरस्त किए गए राशन की दुकान के मामले में पुलिस ने एफआर तत्कालीन डीलर के पक्ष में लगा दी है। इसके बाद आरोपी पक्ष अब हाईकोर्ट से पुन: जांच के आदेश ले आया है। तत्कालीन एसडीएम ने जांच के बाद कोटा निरस्त की कार्रवाई की थी। डीलर व ग्रामीणों ने इसकी शिकायत डीएम से की।
गांव लहरा एमनीपुर के नगला नया में कोटा डीलर ब्रजेश कुमार ने राशन का गेहूं 10 फरवरी 2013 को बाजार में बेचने के लिए भेजा था। इसे ग्रामीणों की सूचना के बाद पकड़ लिया गया था। इस मामले में शिकायत के बाद डीएम ने जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कोटा डीलर को अपना पक्ष रखने को कहा गया था। डीलर की ओर से जो जवाब पेश किया वह तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक ने सही नहीं पाया और एसडीएम को रिपोर्ट सौंप दी थी।
डीएम के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम अमित कुमार ने 26 अप्रैल 2013 को कोटा निरस्त कर दिया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया में लहरा एमनीपुर निवासी ममता देवी को डीलर चयनित किया था। तभी से लगातार वह कोटा का संचालन कर रही है। इस मामले में अभी हाल ही में पुलिस ने निरस्त किए गए कोटा के मामले में एफआर लगा दी। इसके बाद निरस्त किए गए कोटा का मामला ब्रजेश हाईकोर्ट ले गया। वहां से मामले में पुन: जांच के आदेश दिए। कोटा डीलर व ग्रामीणों का कहना है कि जब कालाबाजारी के आरोप में कोटा निरस्त किया था। तो पुलिस ने इस मामले में एफआर कैसे लगा दी। वह इसकी शिकायत डीएम से करेंगे।