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दस रुपये प्रति सैंकड़े की दर से फाइनैंसर से लिया था कर्ज, दबाव से तंग आकर युवक ने ट्रेन के नीचे कटकर दी जान

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मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना, कर्ज के डर से दुनिया नहीं छोड़ रहा बल्कि आपको परेशान नहीं करना चाहता
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
मम्मी पापा मुझे माफ कर देना, कर्ज के डर से दुनिया नहीं छोड़ रहा बल्कि आपको परेशान नहीं करना चाहता। आप झगड़ा मत करना और छोटे भाई शिवम का ख्याल रखना। यह बात अप्पू नगर वासी साहिल (23) ने सुसाइड नोट में लिखी। 10 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से ब्याज चुका पाने में नाकाम होने पर साहिल ने ट्रेन के आगे आकर जान दे दी। हादसा इतना दर्दनाक था कि सिर धड़ से अलग होकर ट्रैक के दूसरी ओर जा गिरा। मृतक की जेब से पुलिस ने पांच पेज का एक सुसाइड नोट बरामद किया है। सुसाइड नोट में एक फाइनेंसर पर उसे प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। जीआरपी पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर फाइनेंसर कुलवंत के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।
अप्पू नगर निवासी युवक साहिल मोबाइल संबंधी काम करने के लिए रोजाना फतेहाबाद से हिसार जाता था। घटना के बारे में मृतक के पिता पवन कुमार ने बताया कि उसका बेटा हिसार में मोबाइल कंपनी में काम करता था और सोमवार को भी हिसार जाने की बात कहकर घर से गया था। शाम को उसने फोन कर बेटे को जल्दी बुलाया मगर वह साढ़े 9 बजे तक भी नहीं लौटा। रात को 11 बजे उसे भट्टू पुलिस का फोन आया और बताया कि उनके बेटे ने रेल के नीचे आकर सुसाइड कर लिया है। ये सुनते ही घर में कोहराम मच गया और आनन-फानन में परिजन भट्टू पहुंचे और मृतक के शव की शिनाख्त की। मृतक के पिता के अनुसार उसके पुत्र ने फाइनेंसर कुलवंत जांगड़ा, राजेश जांगड़ा से 10 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से पहले 18 और बाद में 12 हजार ब्याज पर रकम ली थी, जिसके दबाव में आकर उसने यह कदम उठाया है। मृतक के पिता ने रोते हुए कहा कि यह फाइनेंस नहीं फांसी है, मैं कार्रवाई तो नहंी मगर चाहता हूं कि आगे से किसी का बेटा ऐसे ना मरे।
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पापा मम्मी से झगड़ना नहीं, ऐसा ना हो कि जो मैने किया वो दूसरा पुत्र भी करें
‘मम्मी पापा मेरे को माफ कर देना, मुझे पता है, मैं गलती कर रहा हूं, मगर यह मैं जान बूझकर नहीं बल्कि मजबूरी में यह कदम उठा रहा हूं। जब मैं हिसार काम करता था तो मेरी तनख्वाह तीन बार में काफी कम हो गई और मैंने घर न बताकर जांगड़ा से 10 रुपये प्रति सैकड़ा पर रकम उठाकर तनख्वाह पूरी करके घर देता था। मैं काफी परेशान था, इसलिए नौकरी की कहकर दिल्ली चला गया, जहां 10 दिन तक नौकरी ढूंढता रहा, गुरूद्वारा में रहा और बाद में सैमसंग कंपनी में नौकरी मिली, लेकिन पैसों की तंगी बनी रही और ब्याज भी बढ़ता रहा। रहने का खर्चा, मोबाइल की किश्त, फाइनेंसर की किश्त से बहुत परेशान था, जो मोबाइल लिया, वो भी चोरी हो गया। इसके बाद फाइनेंसर परेशान करने लगा, मगर मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था। मैंने जांगड़ा के 40 हजार और बैंक के 18 हजार रुपये उधार देने थे। जांगड़ा डरा रहा था और 2 लाख रुपये का चेक बैंक में लगाकर केस की धमकी दे रहा था। उससे ब्याज कम करने को कहा, मगर वह नहीं माना। मम्मी-पापा, मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था। कहने वाले कहेंगे कि कोई 50-60 हजार के लिए जान नहीं देता, मगर यह भी सच है कि मरने वाला कभी झूठ नहंी बोलता, जो लिखा है, सच लिखा है। मैं कर्ज के डर से दुनिया नहीं छोड़ रहा, बल्कि आपको परेशान नहीं करना चाहता था। मेरी आखिरी इच्छा पूरी करना कि मेरी मौत से आपका दुख होगा, मगर आप इसका कारण ढूंढने हिसार, दिल्ली मत जाना। मेरे जीते-जी तो विश्वास नहीं किया, मगर अब मेरे मरने के बाद विश्वास कर लो। पापा जी मम्मी से लड़ना नहीं, मैं आपको खुश देखना चाहता हूं। मेरी मौत का मातम या कलेश नहीं करना और खुश रहना। जो काम मैने किया, वो काम मम्मी आप मत करना और छोटे भाई शिवम का ख्याल रखना। ऐसा ना हो कि जो काम एक पुत्र करके गया है, वही काम दूसरा पुत्र आपके क्लेश के कारण कर जाए, यही मेरी आखिरी इच्छा है। आखिरी बात यह कि मैं वापस आऊंगा, मैं जरूर वापस आऊंगा, मेरा वादा है आपसे।’
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