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मानवाधिकार आयोग के जांच में 07 पुलिसकर्मी दोषी

Sun, 07 Jun 2015 02:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला अागरा
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मानवाधिकार आयोग की जांच में सात पुलिसकर्मी मानवाधिकार उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं। इन्होंने खंदौली के मजदूर निन्नोराम के बेटे रवि के अपहरण के मामले में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया था। आयोग का निर्देश है कि पीड़ित को एक लाख रुपये आर्थिक सहायता दी जाए। यह पैसा दोषियों के वेतन से कटेगा। उनके खिलाफ विभागीय जांच कराने के लिए भी एसएसपी से कहा गया है।
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खंदौली के गढ़ी जगजीवनराम निवासी मजदूर निन्नोराम के पुत्र रवि (22) का पांच साल पहले अपहरण कर लिया गया था। पुलिस ने तमाम चक्कर काटने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया था। गांव की एक युवती के घर से भागने के मामले में रवि पर आरोप लगाए गए थे। इसको लेकर पुलिस ने परिवार का उत्पीड़न किया था। इस शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने जांच के बाद मानवाधिकारों का उल्लंघन पाए जाने पर पीड़ित निन्नोराम को एक लाख रुपये की धनराशि अंतिम सहायता के रूप में भुगतान करने के निर्देश दिए।

साथ ही आयोग ने इस मामले में उपनिरीक्षक एमपी शर्मा, कांस्टेबिल बृजबल्लभ, आरके सिंह, भौरंगलाल, आरपी सिंह यादव, गया प्रसाद वर्मा और एसके उपाध्याय को दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के साथ ही उनके वेतन से वसूली दंड वसूलकर राजकोष में जमा कराने के आदेश एसएसपी को दिए।
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आयोग ने प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को सम्मन भेजा है कि वे खुद उपस्थित होकर इस बात का प्रमाण दें कि पीड़ित को एक लाख रुपये अंतरिम राहत के रूप में भुगतान कर दी गई है। इस संबंध में प्रदेश शासन के अनु सचिव शैलेंद्र कुमार ने एसएसपी को पत्र भेजकर भुगतान की रसीद व साक्ष्य शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
 क्या था मामला
खंदौली के गढ़ी जगजीवन में रहने वाले निन्नोराम मजदूर हैं। बेटे के गम में लकवा मार चुका है। अब चलने फिरने से लाचार हैं। चार बेटों में दूसरे नंबर का रवि पांच साल पहले पुलिस के उत्पीड़न से तंग आकर गायब हो गया था। उन्हें अब तारीख याद नहीं है। गांव की एक लड़की खंदौली के एक युवक के साथ भागी थी। इस मामले में बेटे रवि का हाथ होने के संदेह में खंदौली की पुलिस ने परिवार का उत्पीड़न किया। बाद में लड़की दूसरे युवक के पास से बरामद हो गई। लेकिन बेटा रवि इसके बाद लापता हो गया।  थाने के चक्कर काटे मगर सुनवाई नहीं हुई। आजिज आकर कोर्ट का सहारा लेकर अपहरण का मुकदमा कराया। आज तक बेटे का पता नहीं चल सका है।
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