किशनी। थाना परिसर में ही खंडहर इमारत में पकड़े गए वाहनों का चीरहरण किया जाता है। पुलिसकर्मी अपने निजी वाहनों के पुराने हो चुके पार्टस को बदल लेते हैं। इसके चलते समय से पूर्व ही वाहन कबाड़ हो जाते हैं। जब तक वाहन रिलीज होता है तो उसकी हालत देखकर मालिक भी लेने को तैयार नहीं होता। जनपद में आए दिन वाहनों के चोरी होने के मामले थानों में दर्ज होते हैं। लेकिन बरामदगी के नाम पर कुछे ही वाहन मिल पाते हैं।
जब पीड़ित को वाहन मिलता है तो उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी होती है। पहिए से लेकर कई पार्टस बदले जा चुके होते हैं। आलम यह होता है कि वाहन भी चलने की हालत में नहीं होता। थाना किशनी में तो वाहनों के पार्टस बदलने का काम सारी सीमाएं पार कर रहा है। थाना परिसर में चोरी, लावारिस व अन्य मामलों में पकड़े गए वाहनों से पुलिसकर्मी जमकर फायदा ले रहे हैं। वाहनों के टायर से लेकर एक-एक पार्टस को बदलने का खेल चल रहा है। परिसर में वाहनों से पार्टस बदले जान का यह खेल अमर उजाला के कैमरे में कैद हो गया। जब वहां माजूद पुलिसकर्मी से पार्टस बदलने के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि इतना बड़ा थाना है वह कहां तक देखरेख करें।
जबकि पार्टस बदलने के समय वहां संतरी ड्यूटी पर तैनात था, होमगार्ड व अन्य पुलिसकर्मी भी खड़े हुए थे। वहीं मिस्त्री वहां से भाग गया। जिन वाहनों से पार्टस बदले गए थे वह भी जैसे के तैसे पड़े हुए थे। सूत्रों के मुताबिक जब भी किसी वाहन से पार्टस बदलने होते हैं तो पुलिसकर्मी एक स्थानीय किसी मिस्त्री को पकड़ कर लाते हैं और वाहनों के पार्टस की अदला बदली कर दी जाती है। सिर्फ दो पहिया वाहन ही नहीं परिसर में कार से लेकर अन्य बड़े वाहनों के पार्टस भी बदले जाते हैं।