मैनपुरी। पुलिस को किसी बड़ी वारदात होने पर ही मोती और जॉनी याद आते हैं। खोजी श्वान की इस जोड़ी ने अब तक पुलिस को कई कामयाबी दिलवाई हैं। छह माह में चार बडे़ खुलासे भी किए हैं। इन पर प्रति माह करीब 18 हजार का खर्च भी होता है।
नौ महीने की मिलिट्री ट्रेनिंग के बाद तीन प्रशिक्षकों के साथ मैनपुरी पुलिस को सेवाएं दे रहे रहे खोजी श्वान मोती और जॉनी ने पुलिस को कई बड़ी वारदात के बाद के खुलासे को लेकर अहम भूमिका निभाई है। प्रशिक्षक सत्यवीर सिंह, अनुराग यादव और सहायक हरवीर सिंह खोजी श्वान की देखरेख में तैनात हैं।
बेंजिल शेफर्ड प्रजाति के खोजी श्वान बीएसफ सेंटर टमनपुर ग्वालियर में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हैं। प्रशिक्षक ने बताया कि प्रतिदिन दोनों के आहार पर करीब 590 रुपये का खर्च आता है।
प्रतिमाह तकरीबन 18000 से अधिक का खर्च होता है। प्रशिक्षक के निर्देशों का पालन करने वाले ये खोजी श्वान कई बार पुलिस को सफलता दिला चुके हैं। बीते छह माह में दन्नाहार में धड़ से सिर अलग शव मिलने के बाद सिर को बरामद करने में खोजी श्वान की भूमिका सबसे अहम रहीं।
इसके अलावा थाना एलाऊ क्षेत्र में कई दिन से अगवा किए किशोर का शव बरामदगी, कोतवाली क्षेत्र के गांव नगला जुला में पति की हत्या करने वाली पत्नी की गिरफ्तारी समेत कई अन्य वारदातों में भी खोजी श्वान की इस जोड़ी ने पुलिस को सफलता दिलाई है।
प्रतिदिन मीट, दलिया, दूध, अंडा का पौष्टिक आहार दिया जाता है। वहीं प्रतिदिन इनकी ट्रेनिंग भी नियमानुसार कराई जाती है।
अच्छा रहन सहन और पौष्टिक आहार खोजी श्वान को दिया जाता है। मगर जब यह कोई गलती करते हैं या प्रशिक्षक की बात नहीं मानते तो इन्हें सजा भी दी जाती है। प्रशिक्षक सत्यवीर सिंह ने बताया कि मोती हर निर्देश का पालन करता है। मगर कभी कभी जॉनी का मूड आफ हो जाता है। सजा के तौर पर इन्हें परिसर में लेट कर पलटियां खाने की सजा दी जाती है।
प्रशिक्षकों के मुताबिक खोजी श्वान शरीर की गंध (हृयूमन सेंट) के सहारे अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं। घटनास्थल को सील न किया गया हो, उस पर कई लोग पहले ही पहुंच गए हों, ऐसे स्थानों पर सफलता का प्रतिशत कम हो जाता है। अगर घटनास्थल पर घटना से संबंधित कोई वस्तु मिलती है। तब भी खोजी श्वान कामयाबी हासिल कर ही लेते हैं।