33 साल पहले जमानत पर जेल से रिहाई के बाद फरार हुए विजय नंदन श्रीवास्तव मेंटल उर्फ डॉन को आखिरकार न्यू आगरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। अजमेर में उसने अपना ठिकाना बना रखा था। पुलिस गुरुवार को उसे आगरा ले आई। उसकी गिरफ्तारी से जहां थाना पुलिस ने राहत की सांस ली, वहीं अधिकारी भी इसे बड़ी कामयाबी बता रहे हैं।
न्यू आगरा एसओ नितिन कसाना ने बताया कि बल्केश्वर के सरस्वती विहार निवासी अशोक कुमार की 1981 में घर के बाहर चाकू से गोदकर हत्या की गई थी। इस मामले में विजय नंदन उर्फ डॉन को नामजद किया गया था। अशोक कुमार विजय का साथी था। उनमें किसी बात पर विवाद हो गया। अशोक ने गोलियां चलाई तो उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में 12 जनवरी 1933 को विजय को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस पर उसे 22 जनवरी 1983 को फतेहगढ़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
आरोपी पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई। कोर्ट के आदेश पर मामला हत्या के बाद गैर इरादतन हत्या में बदल दिया गया। बाद में विजय को कोर्ट से जमानत भी मिल गई। जमानत मिलने के बाद वह न तो कोर्ट में हाजिर हुआ और न ही कभी सामने आया। उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी गई तो पता चला कि वह घर से परिवारजनों को लेकर फरार हो गया है। वहीं उसके केस से संबंधित पत्रावलियां भी गायब हो गई थीं। वारंट जारी होने के बाद भी हाथ नहीं आ रहा था।
इस कारण पुलिस के आला अधिकारियों को भी कई बार हाईकोर्ट ने तलब किया। इस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए डीजीपी ने आदेश दिए थे। उसकी गिरफ्तारी के लिए गाजियाबाद, फीरोजाबाद सहित कई जिलों में दबिश दी। पिछले आठ दिन से टीम लगी थी। मुखबिर की सूचना पर विजय नंदन को अजमेर के लिंक रोड, अना सागर से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे पुलिस आगरा ले आई।
सिक्योरिटी एजेंसी चला रहा था
आगरा से फरारी के बाद विजय नंदन अजमेर में सिक्योरिटी एजेंसी चला रहा था। उसकी बेटी की शादी मध्य प्रदेश में हुई है। वहीं पत्नी की मौत हो गई थी।
रकाबगंज में थी आढ़ंत
एसओ के मुताबिक, विजय नंदन पर चौथ वसूली, रंगदारी, हत्या के मामले दर्ज थे। उसने अपना गैंग बना रखा था। उसके दो साथी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए थे। इसके बाद से उसका गैंग टूट गया था।