होटल मैनेजमेंट का कोर्स कराने और विदेश भेजने का झांसा देकर 70 छात्र-छात्राओं को तकरीबन ढाई करोड़ रुपये का चूना लगा दिया गया। बीपी इंस्टीट्यूट होटल एंड टूरिज्म कॉलेज के कर्ताधर्ता एक पखवाड़े पहले कॉलेज में ताला लगाकर रफूचक्कर हो गए। छात्र-छात्राओं का एजूकेशन लोन कॉलेज ने अपने बैंक खाते में जमा कराया था। अब छात्र भटक रहे हैं। शुक्रवार को दो दर्जन छात्रों ने डीआईजी लक्ष्मी सिंह से शिकायत की। डीआईजी ने एसएसपी को जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
सिकंदरा के भाग्य नगर खंदारी में यह कॉलेज चार साल पहले खोला गया था। इसके निदेशक गधापाड़ा, छत्ता निवासी विवेक रमन हैं। कमला नगर के सचिन शुक्ला, अमित कुमार, रामू जसावत समेत 25 छात्रों ने शुक्रवार को डीआईजी को बताया कि उन्होंने कॉलेज में वर्ष 2012 में दाखिला लिया था। निदेशक ने कोर्स करने के बाद सर्विस लगवाने और शंघाई तक घुमाने की बात कही थी। इसके बाद इंस्टीट्यूट में 70 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। इसके बाद संचालक ने सेंट्रल बैंक की सिविल लाइंस शाखा से छात्रों के नाम अलग-अलग धनराशि के तकरीबन ढाई करोड़ रुपये के एजूकेशन लोन स्वीकृत कराए। इनमें से सबसे अधिक धनराशि चार लाख और 2.95 लाख रुपये थी। धनराशि कॉलेज के बैंक खाते में जमा करवाई गई। छात्रों को झांसा दिया कि ये पैसा उनके ही काम आएगा। फीस भी इन्हीं रुपयों से ली जाएगी। छात्रों ने बताया कि बैंक से वसूली नोटिस आने पर उन्हें ठगे जाने की जानकारी हुई। इसके बाद से कालेज संचालक फरार हैं। वह किराये के मकान में कालेज चला रहा था।
कभी नहीं लगी क्लास
छात्रों ने बताया कि कॉलेज में कभी क्लास नहीं लगाई गई। कई माह तक वे कहता था कि पेपर दिलवा दूंगा। इसके बाद डिग्री मिल जाएगी। लेकिन किसी छात्र को डिग्री भी नहीं दी गई।
ग्रामीण अंचल के छात्रों का पैसा हड़पा
धोखाधड़ी के शिकार छात्रों में ज्यादातर शमसाबाद, फतेहाबाद, मलपुरा के हैं। रमेश ने बताया कि दिलीप ने उसे एडमिशन दिलाने की बात कही थी। इसी तरह कालेज के संचालक ने देहात क्षेत्रों में भी अपने लोगों को छात्रों को बरगला कर लाने को लगा रखा था।