मैनपुरी। जिले में पहले हुए दो हादसों को लोग भूलते तब तक बुधवार की सुबह हुए हादसे ने अचानक लोगों को रठेरा हादसे की याद दिला दी। पलक झपकते ही हुई मौतों से सहमे लोग कहने लगे होता वही है जो भगवान को मंजूर होता है। बुधवार को हुए हादसे में भी किसी की गलती नहीं मानी जा रही है। बस चलाते समय चालक को आई झपकी से परिवार से मिलने का सपना पाले जा रहे 17 लोग असमय मौत के मुंह में समा गए। रठेरा कांड की ही तरह दुर्घटना के बाद अस्पताल मेें घायलों की सहायता के लिए बढ़े हाथों ने मानवता जिंदा है की याद दिला दी। सेवाभाव के चलते युवा पुलिसकर्मी घायलों की मदद में जुटे रहे।
थाना दन्नाहार के गांव रठेरा के एक परिवार के लोग रिश्तेदारों तथा व्यवहारियों के साथ फरवरी 2012 में लगुन चढ़ाने के लिए स्कूली बस से एटा जा रहे थे। थाना औंछा क्षेत्र में हवेली के पास ट्रक की टक्कर से 25 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में एक ही परिवार के सात लोगों के अलावा एक ही परिवार के दो से तीन लोग तक शामिल थे। मरने वालों में पांच अपने परिवार में अकेले थे। हादसे में 18 लोग घायल हुए थे।
थाना कोतवाली के गांव नगरिया से वर्ष 2007 में एक बारात कन्नौज गई थी। लड़के वालों ने बारातियों के लिए डीसीएम को किराए पर बुक किया था। बारात में जाने के लिए व्यवहारी और रिश्तेदार डीसीएम से रवाना हुए थे। कन्नौज क्षेत्र में चालक की लापरवाही से डीसीएम के अनियंत्रित होकर पलटने से बारात में शामिल होने जा रहे 13 बारातियों की मौके पर ही मौत हुई थी। डीसीएम सवार 14 बाराती गंभीर रूप से घायल हुए थे।