मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सराफा कारोबारियों की हत्या-लूटकांड में पुलिस वालों के शामिल होने और पुलिस और बदमाशों के बीच गठजोड़ की बात यूं ही नहीं कह दी है। पुख्ता रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने ये बयान दिया है। ये रिपोर्ट थी 28 फरवरी, 2015 को हुए तोलेबाबा हत्याकांड पर। इस हत्या में कुख्यात राकेश उर्फ रंगा, उसका भाई मुकेश उर्फ बिल्ला, नीरज और कामेश नामजद थे। लेकिन फिर भी खुलेआम अपने घर पर रह रहे थे।
व्यापारियों से चौथ वसूली की जा रही थी। पुलिस पर सूचनाएं पहुंच रही थीं। लेकिन वर्दी वालों ने कभी इन दोनों को गिरफ्तार नहीं किया। दबिश नहीं दी। अगर इन्हें तभी पकड़ लिया होता तो मथुरा में जो हत्याकांड हुआ वह न होता। सराफ मेघ अग्रवाल और विकास अग्रवाल की हत्या कर चार करोड़ का सोना लूटने के मामले में पुलिस पर आरोप लगने के कई कारण हैं।
प्रकरण में पुलिस ने कदम-कदम पर लापरवाही बरती है। 15 मई की रात को करीब सवा आठ बजे जब बदमाश लूटपाट कर रहे थे तो पुलिस को सूचना दी गई थी लेकिन पुलिस पहुंची ही नहीं। होलीगेट पर तैनात दरोगा को भी जाकर एक व्यापारी ने बताया लेकिन वह भी नहीं हिला। अधिकारी घटना के करीब पौन घंटे बाद पहुंचे।
सराफा की हत्या में गिरफ्तार तीन भाई राकेश उर्फ रंगा, नीरज और कामेश 28 फरवरी, 2015 को हुए तुलसीदास उर्फ तोले बाबा मर्डर में भी नामजद थे। लेकिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार नहीं किया। ये उस वक्त भी कहीं बाहर नहीं गए थे। सभी चौबियापाड़ा में अपने घर पर रह रहे थे। शहर में भी निकलते थे। बाजार में देखे जाते थे। कारोबारियों से चौथ वसूली कर रहे थे। बस, पुलिस को कभी नजर नहीं आए। इस दौरान कई अधिकारी तैनात रहे लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की।
डीजीपी और कैबिनेट मंत्री ने दी थी रिपोर्ट
कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा और डीजीपी सुलखान सिंह
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सराफा कारोबारियों की हत्या-लूटकांड के बाद कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा और डीजीपी सुलखान सिंह मथुरा पहुंचे थे। इन दोनों ने भी मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि पुलिस की भारी लापरवाही रही है। हत्या के नामजद अभियुक्त खुलेआम घूम रहे थे। रंगा और उसके भाइयों से चौबियापाड़े के ही लोग नहीं बल्कि कई कारोबारी भी परेशान थे।
पुलिस तक भी इनकी शिकायतें पहुंचती थीं। लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं। एक व्यक्ति ने बताया कि जब भी पुलिस से पूछते थे तो कह देते थे कि वह तो फरार हैं। घर पर कोई है ही नहीं। जबकि वह एक दिन के लिए भी मुहल्ले से बाहर नहीं गए थे। पुलिस तक उनकी 50 से भी ज्यादा शिकायतें पहुंची थीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
यह हैं जिम्मेदार
एसएसपी-तीन
एसपी सिटी-पांच
सीओ सिटी-तीन
कोतवाल- चार
चौकी इंचार्ज-10
बीट के दरोगा-9
बीट के सिपाही-20
चीता मोबाइल-11
रात का गश्ती दल-11
पुलिस की मोबाइल टीमें-14
खुफिया एजेंसियों की टीमें-10