मथुरा में सराफा हत्याकांड के आरोपियों से मुठभेड़ के लिए 100 सिपाहियों का दस्ता बनाया गया। इनको 10-10 जवानों की टीम में विभाजित किया गया। इनमें से चुनिंदा टीमें रात 12 बजे भेजी गईं। जिस स्थान पर लुटेरों के होने का अंदेशा था उसे चिह्नित कर लिया गया।
इसके बाद पुलिस की टीमों ने छतों पर मोर्चा संभाल लिया। बदमाशों के ठहरने वाले मकान को चारों तरफ से घेर लिया गया। इस सब में पुलिस को छह घंटे लगे। आसपास के लोगों को घरों में कैद कर दिया गया था। सभी से मोबाइल भी बंद करा दिए गए थे। पुलिस को अंदेशा था कि मोहल्ले में लुटेरों से संबंधित लोग भी हो सकते हैं। ये लोग पुलिस की रणनीति से उनको वाकिफ न करा सकते हैं।
चौबियापाड़ा की गलियों में दस सिपाहियों ने गाइड की भूमिका निभाई। बताया गया कि ये सिपाही इन गलियों के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे। इससे मुठभेड़ को प्लान करने में काफी सहायता मिली। पुलिस ने आखिर चौबियापाड़ा की संकरी गलियों में से लुटेरों को बिना किसी क्षति के दबोचने में सफलता प्राप्त कर ली।