गिरौरा गांव के इसी स्थान से खोदी गई मिट्टी। - अमर उजाला
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एटा। मिट्टी घोटाले में परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। पड़ताल में सामने आया है कि पीएनसी इंफ्राट्रेक लि. की ओर से मिट्टी खोदने का आवेदन किया गया था जिसमें 3300 घन मीटर मिट्टी खोदने के अनुमति मांगी गई थी लेकिन कंपनी की ओर से नियमों को पूरा नहीं करने के कारण से न तो तहसील स्तरीय समिति से अनुमति मिली और न ही जिला स्तरीय समिति ने कोई परमीशन दी।
पीएनसी कंपनी की ओर से मनमानी करते हुए गिरौरा ग्राम पंचायत से 113080 घन मीटर मिट्टी काट ली। इसकी पुष्टि पिछले दिनों खनन विभाग के अधिकारियों और लेखपाल की ओर से किए गए सर्वे में सामने आई। पीएनसी इंफ्राट्रेक लि. ने अन्य गांवों से भी मिट्टी का कटान किया गया है, अब उनकी भी जांच शुरू हो गई है। वहीं ग्राम पंचायत बरई के मजरा बड़ागांव में मिट्टी काटी गई है। यहां पर अभी तक अनुमति लेने की प्रक्रियाएं पूर्ण नहीं हो सकी है जब कि मिट्टी का कटान सैकड़ों बीघा जमीन से कंपनी द्वारा किया जा चुका है। जांच शुरू होते ही पीएनसी इंफ्राट्रेक लि. अपनी गर्दन बचाने में जुट गई है। हालांकि मिट्टी का मूल्यांकन भी कराया जा रहा है कि जिले में अब तक कंपनी कितनी मिट्टी काट चुकी है।
मिट्टी का अलग से होता है भुगतान
हाईवे निर्माण कार्य करने वाली कंपनियों को एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी मिट्टी कार्य का अलग भुगतान करती हैं। इसका राजस्व कंपनी को सरकारी राजकोष में जमा करना होता है। पीडब्ल्यूडी की ओर से एटा-कासगंज फोरलेन पर डाली गई 1.57 लाख घन मीटर मिट्टी का दो करोड़ 60 लाख रुपये भुगतान कर चुकी है। ऐसे ही नेशनल हाईवे पर भुगतान किया जाएगा।
पीएनसी इंफ्राट्रेक लि. कंपनी की ओर से मिट्टी काटने के लिए 3300 घन मीटर का आवेदन किया गया था। नियम व शर्ते पूर्ण न होने की वजह से तहसील व जिला स्तरीय समितियों की ओर से अनुमति नहीं दी गई थी। प्रथम दृष्टया जांच में पाया गया है कि कंपनी द्वारा 1.13 लाख घनमीटर मिट्टी खोदी गई है। जिले में और कहां कहां से मिट्टी काटी गई है इसकी जांच शुरू कर दी गई है। दुर्गेश यादव, तहसीलदार सदर