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अब मिट्टी घोटाला: पीएनसी ने बिना राजस्व जमा किए ही काट ली करोड़ों की मिट्टी

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एटा। जनपद घोटालों का केंद्र बन गया है। एक एक बाद एक नए मामले सामने आ रहे हैं। अब मिट्टी के नाम पर घोटाला होना प्रकाश में आया है। इसमें हाईवे निर्माण कार्य में डाली गई मिट्टी में कार्यदायी संस्था पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड ने करोड़ों का घोटाला कर डाला। कंपनी ने सरकारी जमीन की राजस्व विभाग से बिना अनुमति लिए ही 10-10 फुट गहरे गड्ढे कर मिट्टी खोद डाली। इसी मिट्टी को एटा-कासगंज फोरलेन और नेशनल हाईवे पर डाला गया। इसका कोई राजस्व भी जमा नहीं किया गया। जबकि पीडब्ल्यूडी से इसका करोड़ों का भुगतान कराया गया है। एक शिकायत पर मामले की जांच कराई गई तो पूरा मामला प्रकाश में आया।
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एटा-कासगंज फोरलेन का कार्य कार्यदायी संस्था पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड की ओर से किया गया। इस मार्ग पर मिट्टी का कार्य भी प्रस्तावित था, इस मार्ग पर मिट्टी का भराव 157769 घन मीटर किया गया है। इतना ही नहीं पीडब्ल्यूडी की ओर से किए गए आंकलन में मिट्टी डालने की कीमत 2.60 करोड़ रुपये है। पीएनसी की ओर से जहां से मिट्टी काटी गई है, वह जमीन तालाब और अन्य सरकारी संपत्ति में दर्ज है। लेकिन कंपनी की ओर से मनमाने तरीके से मिट्टी का कटान करा लिया और सरकार को करोड़ों रुपये की क्षति पहुंचाई गई। मिट्टी घोटाला होने की भनक तहसील के अधिकारियों को होनश्े पर कंपनी से जवाब तलब किया गया है। अब कंपनी अपनी गर्दन बचाने में लगगी हुई है।
प्रधान से मिलकर किया गया खेल
पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के अधिकारियों ने एटा-कासगंज फोरलेन पर मिट्टी डालने के लिए ग्राम पंचायत गिरौरा के तालाब और अन्य सरकारी संपत्ति की मिट्टी काटी गई है। ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन से मिट्टी काटने की कोई अनुमति नहीं ली गई और न ही धनराशि जमा की है। ग्राम समाज व अन्य सरकारी संपत्ति का रख-रखाव की जिम्मेदारी प्रधान की होती है। लेकिन प्रधान ने मिट्टी कटने से पहले कार्यदायी संस्था से कोई दस्तावेज नहीं लिए अथवा देखे और नहीं राजस्व विभाग व प्रशासन को कोई लिखित सूचना दी।
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बड़ागांव में भी काटी गई तालाब की मिट्टी
नेशनल हाईवे पर मिट्टी डालने के लिए बिना अनुमति ग्राम पंचायत बरई के मौजा बड़ागांव में तालाब से मिट्टी काटी गई है। यहां के ग्रामीणों ने तहसीलदार से शिकायत भी की गई है और मिट्टी कटान रुकवाने के लिए शिकायती पत्र भी दिया गया है। तहसीलदार मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करने भी पहुंचे तो मिट्टी घोटाला सामने आया है।
तहसील से नहीं जारी की गई कोई अनुमति
पीएनसी के अधिकारियों ने मिट्टी डालने के लिए कोई अनुमति नहीं ली। बिना अनुमति के ही दोनों हाईवे पर मिट्टी काटने का काम किया है। शिकायत के बाद तहसीलदार ने मिट्टी कटाने की अनुमति देने के दस्तावेजों को खोजा तो कुछ भी सामने नहीं आया है। इस पर कार्यदायी संस्था से पूछा गया है कि उन्होंने मिट्टी डाली है तो वह लाए कहां से।
कार्यदायी संस्था पीएनसी की ओर से मिट्टी जगह-जगह से मिट्टी काटने का काम किया गया है। इसकी अनुमति नहीं ली गई है, पीएनसी कंपनी के अधिकारियों से भी अनुमति पत्र मांगा गया है लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
दुर्गेश यादव, तहसीलदार सदर, एटा
एटा कासगंज फोरलेन और हाइवे निर्माण कराने के लिए हमने मिट्टी काटने की अनुमति ली थी। मैं इस समय बाहर हूं। ज्यादा जानकारी नहीं दे सकता। आर के जैन, प्रोजेक्ट मैनेजर, पीएनसी
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