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नमक न मिलाते तो पहले ही फूट जाता नकली खाद का भांडा

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नकली खाद बीज फैक्टरी: मिट्टी में नकली खाद के विघटन के लिए मिलाते थे नमक
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मैनपुरी। फैक्टरी में बड़े पैमाने पर नकली खाद बनाया जा रहा था। जांच में पता चला है कि खाद में बड़ी मात्रा में नमक मिलाया गया था। इससे खेत में छिड़काव के दौरान सिलिका सैंड और नमक मिली नकली खाद मिट्टी में मिल जाती। साथ ही इसका विघटन भी हो जाता है। वहीं, किसान इसकी नकली होने की बात तक पकड़ तक नहीं पाता है।
यदि इसमें नमक नहीं मिलाया जाता तो सिलिका सैंड कठोर अवस्था में रह जाती और खाद नकली होने की पुष्टि हो जाती। जांच से कृषि विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। गांव नगला जुला में आठ अक्तूबर को प्रशासन ने नकली खाद बीज की फैक्टरी पकड़ी थी। यहां नकली खाद, बीज, केमिकल के साथ-साथ बड़ी मात्रा में नमक पकड़ा गया था। गोदाम से नमक की 250 बोरियां बरामद हुई थीं, जिनमें 125 क्विंटल नमक था। इस नमक का प्रयोग खाद में किया जा रहा था।
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कृषि विभाग के अधिकारी भी ये बात नहीं समझ पा रहे थे कि खाद में नमक का प्रयोग क्यों किया जा रहा था। जो यहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि विभागीय अधिकारी भी चौंक गए। उन्होंने बताया कि अगर नमक नहीं मिलाया जाता तो नकली खाद का भांडा फूट जाता है। नकली खाद सिलिका सैंड, कलर और केमिकल डालकर तैयार की जा रही थी।
ऐसे में खेत में डालने के बाद ये खाद जस की तस ठोस अवस्था में पड़ी रहती है। इससे किसानों को शक हो जाता है। इसका तोड़ निकालने के लिए नकली खाद में नमक का प्रयोग किया जाता था। जैसे ही ये खाद खेत में नमी के संपर्क में आती थी तो नमक के कारण इसका विघटन शुरू हो जाता था और वह मिट्टी में मिल जाती थी।
बंजर हो रही थी जमीन
नकली खाद में नमक के प्रयोग से जमीन भी बंजर हो रही थी। नमक एक क्षारीय यौगिक है। ऐसे में मिट्टी में क्षारीय यौगिक के प्रयोग से जमीन भी क्षारीय हो जाती है, लेकिन खाद बनाने वालों को तो अपनी कमाई से मतलब था। फिर चाहे जमीन बंजर हो या क्षारीय।
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आज तक खाद की जांच के लिए कई बार नमूने फेल हुए, लेकिन कभी भी नमक का प्रयोग सामने नहीं आया। पहली बार खाद में नमक के प्रयोग का मामला सामने आया है। खाद मिट्टी में मिल जाए इसके लिए नमक का प्रयोग किया जाता था।
-डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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