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पति को सजा दिलाने में ‘मां’ ने क्यों की पैरवी

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मैनपुरी। पुत्र की मौत के बाद सदमे में आई मां ललिता ने अपने पति को सजा दिलाने के लिए पैरवी की। हर तारीख पर वह नियमित रूप से अदालत पहुंची। पति के खिलाफ गवाही दी। रिश्तेदारों के समझौता कराने के प्रयास के बाद भी वह अपने फैसले पर कायम रही। बुधवार को निर्णय सुनने के लिए भी वह अदालत पहुंची।
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चार साल पूर्व पुत्र की हत्या के बाद ललिता देवी ने अपने पति को सजा दिलाने की ठानी। उसने पुलिस को पति के खिलाफ गवाही दी। पति को पकड़वाने के लिए उसके छिपे होने के ठिकाने भी बताए। पुलिस ने दूसरे दिन ही पति हुसयार को पकड़कर जेल भेज दिया था। कोर्ट में चार्जशीट पेश होने के बाद वह हर तारीख पर पैरवी करने अदालत पहुंची। उसके कुछ रिश्तेदारों ने समझौता कराने की पहल की, लेकिन वह नहीं मानी। अपने पुत्र की हत्या के आरोपी पति से चार साल में वह एक बार भी मिलाई करने नहीं पहुंची। पति को सजा मिलने के बाद उसके चेहरे पर खुशी नजर आई।
इकलौते पुत्र की हत्या से थी परेशान
पांच साल का पवन अपनी मां ललिता का इकलौता पुत्र था। लग्न समारोह के बाद हुसयार नाराज होकर पुत्र को लेकर चला तो ललिता ने विरोध भी किया लेकिन हुसयार जबरन पवन को साथ ले गया। इकलौते पुत्र की हत्या के बाद चार साल तक ललिता परेशान रही।
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जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा
पुत्र की हत्या करने के मामले में पुलिस ने सात जुलाई 2016 को हुसयार को जेल भेज दिया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान उसे किसी भी अदालत से जमानत नहीं मिली। उसे पूरा मुकदमा जेल में रहकर लड़ना पड़ा। बुधवार को निर्णय सुनने के लिए उसे जेल से अदालत लाया गया। सजा के बाद उसे दोबारा जेल भेज दिया गया।
अदालत से निकलते ही रोया
अदालत में गुमसुम हुसयार सजा सुनते ही अदालत से बाहर आकर रोने लगा। उसके परिवार का कोई सदस्य अदालत नहीं पहुंचा था। ऐसे में पुलिसकर्मी उसे दिलासा देते हुए दीवानी हवालात ले गए, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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