केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के नए प्रदूषण वर्गीकरण मानकों में होटल उद्योग के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। अब 300 से अधिक कमरों वाले होटल ही लाल श्रेणी में रखे जाएंगे। 100 से 300 कमरों वाले होटल नारंगी श्रेणी में आएंगे। वहीं जिले में बड़ी संख्या में संचालित 20 कमरों तक के छोटे होटल और गेस्ट हाउस के लिए वर्गीकरण में और राहत दी गई है।
सामान्य तौर पर 20 कमरों तक के होटल हरी श्रेणी में होंगे, जबकि रसोई में स्वच्छ या गैस ईंधन का इस्तेमाल करने वाले 20 कमरों तक के होटल सफेद श्रेणी में रखे जाएंगे। पहले 20 कमरों तक के होटल हरी श्रेणी में आते थे। वहीं 21 से 100 कमरों वाले होटल सामान्य तौर पर नारंगी श्रेणी में ही होंगे लेकिन स्वच्छ या गैस ईंधन का इस्तेमाल करने पर ग्रीन श्रेणी में आ सकेंगे।
नए नियमों में 300 से अधिक कमरों वाले होटल ही लाल श्रेणी में होंगे। आगरा में 100 से अधिक कमरों वाला कोई होटल नहीं होने से नए वर्गीकरण का शहर के होटल उद्योग पर बड़ा सीधा असर नहीं पड़ेगा।
50 से अधिक कमरों पर एसटीपी अनिवार्य
नए नियमों में 50 से अधिक कमरों वाले होटलों में एसटीपी लगाना अनिवार्य किया गया है। रसोई से निकलने वाले चिकनाईयुक्त पानी के लिए तेल और ग्रीस ट्रैप की व्यवस्था भी करनी होगी।
रेस्तरां की सीटों से तय होगी श्रेणी
रेस्तरां, ढाबे और भोजनालयों में बैठने की क्षमता के आधार पर श्रेणी तय होगी। 200 से अधिक सीट वाले रेस्तरां नारंगी, 101 से 200 सीट वाले हरे और 100 सीट तक वाले प्रतिष्ठान सफेद श्रेणी में होंगे। सफेद श्रेणी के प्रतिष्ठानों में भी रसोई में तेल और ग्रीस ट्रैप और अपशिष्ट जल प्रबंधन की व्यवस्था करनी होगी।
मैरिज हॉल का क्षेत्रफल बनेगा आधार
स्टैंडअलोन बैंक्वेट और मैरिज हॉल का वर्गीकरण भी उनके क्षेत्रफल के आधार पर होगा। 2500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले हॉल नारंगी, 1000 से अधिक और 2500 वर्ग मीटर तक वाले हॉल हरे और 1000 वर्ग मीटर तक वाले हॉल सफेद श्रेणी में रखे जाएंगे। हॉल की रसोई के निकास पर तेल और ग्रीस ट्रैप लगाना भी जरूरी होगा।
कौन सी श्रेणी क्या
लाल: सबसे अधिक प्रदूषण वाली श्रेणी।
नारंगी: मध्यम प्रदूषण वाली श्रेणी।
हरा: कम प्रदूषण वाली श्रेणी।
सफेद: बहुत कम या नगण्य प्रदूषण वाली श्रेणी।
बढ़ावा मिलने की उम्मीद
होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि नए वर्गीकरण से 100 से 300 कमरों वाले होटलों को लाल श्रेणी से बाहर किए जाने से कारोबारियों को राहत मिल सकती है। इससे होटल उद्योग में निवेश और संचालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
प्रकिया हो जाती थी कठिन
आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप अरोरा का कहना है कि पहले 100 या अधिक कमरों वाले होटलों को लाल श्रेणी में रखने से पर्यावरणीय अनुमति और अनुपालन की प्रक्रिया अधिक कठिन हो जाती थी। अब लाल श्रेणी की सीमा 300 से अधिक कमरों तक किए जाने से मध्यम आकार के होटलों को राहत मिलेगी। हालांकि, पर्यावरण मानकों का पालन हर होटल को करना चाहिए।
जिले में छोटे होटल अधिक
होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के सचिव संजीव जैन ने बताया कि आगरा में बड़ी संख्या छोटे होटल और गेस्ट हाउस की है, इसलिए 20 कमरों तक के प्रतिष्ठानों के लिए किए गए प्रावधान भी महत्वपूर्ण हैं।