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बल्केश्वर गोशाला में आठ बछड़े-बछिया मरे

Tue, 18 Apr 2017 01:23 AM IST
बल्केश्वर गोशाला में आठ बछड़े-बछिया मरे
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बल्केश्वर गोशाला में आठ बछड़े-बछिया मरे - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वाटर वर्क्स स्थित गोशाला में प्रबंधन की घोर लापरवाही की वजह से आठ बछड़े-बछिया ने तड़पकर दम तोड़ दिया है। पिछले तीन दिन से यह सिलसिला चल रहा है। मरने वालों में अधिकांश एक से दो साल तक की बछिया और बछड़े बताए जा रहे हैं। प्रबंधन तंत्र से जुड़े लोग दो दिन तक इस घटना को दबाए रहे। बिना पोस्टमार्टम कराए मृत गोवंश को ठिकाने भी लगा दिया। मरने वाले गोवंश की संख्या ज्यादा भी हो सकती है। मामला उजागर होने के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
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सोमवार सुबह वाटर वर्क्स स्थित श्री गोशाला सोसाइटी, बल्केश्वर रोड के मृत गोवंश को ठिकाने लगाए जाने के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। हिंदू संगठन से जुड़े कुछ युवक मौके पर पहुंच गए। यहां मृत पड़ी एक अन्य बछिया को चोरी छुपे ले जाने की तैयारी चल रही थी। युवकों को देखकर गोशाला कर्मचारी सकपका गए। पूछताछ में पता चला कि बछिया सोमवार सुबह मरी थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था। इससे पहले दो दिन में सात और गोवंश की मौत हो चुकी है। यह सिलसिला शनिवार सुबह से शुरू हुआ। कर्मचारियों की सूचना पर गोशाला के पशुचिकित्सक डा. यूएस गुप्ता के पहुंचने से पहले ही दो गाय मर चुकी थीं। तीसरी तड़प रही थी। इसे बचाने का प्रयास किया लेकिन वह भी नहीं बच सकी। तीनों गायों को बिना किसी को सूचित किए ठिकाने लगा दिया। उनकी मौत का कारण भी जानने की कोशिश नहीं की गई।
24 घंटे बीते नहीं थे कि रविवार सुबह चार और बछिया और बछड़ों ने दम तोड़ दिया। इसकी भी जानकारी उजागर नहीं होने दी। न ही जिला पशुचिकित्साधिकारी के यहां सूचना दी। इसी लापरवाही की वजह से सोमवार को सुबह एक और बछिया ने दम तोड़ दिया। डा. यूएस गुप्ता ने कुल सात गोवंश के मरने की पुष्टि की है। एक भी मृत पशु का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। पशुचिकित्सक का कहना है कि प्रथम दृष्टया पशुओं की मौत का कारण फूट प्वाइजनिंग लग रही है। सूत्रों की मानें तो गोशाला में तीन दिन के भीतर दर्जनभर गोवंश की मौत हुई है। स्टाफ मृत गोवंश की संख्या को छुपा रहा है। गोशाला में कुल 750 गाय हैं।
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इनसेट
...तो बच जाती कई की जान
शनिवार की घटना की जानकारी यदि पशु चिकित्साधिकारी या प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई होती तो शायद रविवार और सोमवार को मौत के मुंह में समाए बछड़े और बछियाओं की जान बच सकती थी। मगर, गोशाला प्रबंधन लगातार इस घटना को छुपाता रहा। इसकी वजह से समय रहते इनका सही से इलाज नहीं हो पाया।

हो सकता है कि कोई दानदाता हमारी जानकारी के बिना संदिग्ध या रखी हुई खाद्य सामग्री गायों को खिला गया हो। इसकी वजह से उन्हें फूट प्वाइजनिंग हुई हो। गोशाला के पशुचिकित्सक ने इनका इलाज किया था, फिर भी पशु बच न सके।
- सुशील गोयल, मैनेजर, श्री गोशाला सोसाइटी

गोशाला की ओर से गायों के मरने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं दी गई है। किसी अन्य माध्यम से जानकारी होने पर पशुधन प्रसार अधिकारी को भेजा जा रहा है।
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विजय वीर चंद्रयाल, उपमुख्य पशुचिकित्साधिकारी
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