सड़कों पर पॉलीथिन खाती, पानी के लिए भटकती गऊ माता को देख हृदय व्यथित होता है। गोपाल के ब्रज में गायों की इतनी दुर्दशा है। इससे इतर कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां गऊ माता मुस्कुराती फलती फूलती हैं। बल्केश्वर की श्री गोशाला उसी में से एक है। दस साल पहले यहां 250 गोवंश थे, आज उनकी संख्या 600 है। यह शहर की सबसे बड़ी गोशाला है।
प्रांगण में ममत्व लुटाती असंख्य गायों को देखना सुखद है। प्राइवेट ट्रस्ट इस गोशाला की व्यवस्था संभालता है। गोशाला के मैनेजर सुशील गोयल और डॉक्टर यूएस गुप्ता ने बताया कि यहां 600 गोवंश हैं, 418 गायें हैं। जो गायें कटने जा रही थीं, उनको यहां विकसित किया। क्रॉस ब्रीडिंग कराई। गायें प्रतिदिन 300 लीटर दूध देती हैं। हमारे यहां से प्रतिदिन एक क्लीनिक के लिए गोमूत्र जाता है। डॉक्टर उसका प्रयोग असाध्य रोगों के इलाज में करते हैं। डॉक्टर यूएस गुप्ता कहते हैं कि जब तक गाय को फाइनेंस से नहीं जोड़ा जाएगा तब तक उसकी दुर्दशा बनी रहेगी। लोग उसे छोड़ते रहेंगे।
पिछले दो साल से हमने बाहर के गौवंश लेना बंद कर दिया है। हमारे पास जगह नहीं है। नेशनल हाइवे में 2000 वर्ग गज जमीन चली गई। वर्तमान गौवंश भी उपलब्ध जमीन से ज्यादा है। दान देने वाले आते रहते हैं। कुछ लोग प्रतिदिन गऊ सेवा करने आते हैं। गौशाला का प्रतिदिन का खर्चा 35000 रुपये है।
आज होगी गायों की पूजा
आज गुरुवार को गोपाष्टमी के शुभ अवसर पर श्रीगौशाला में गायों की पूजा की जाएगी। साथ ही हवन भी होगा। सुबह 10 बजे गौचारण यात्रा निकलेगी जो पुराने शहर का भ्रमण करते हुए पुन: यहां लौटेगी।
गौमाता के लिए विशाल भंडारा
श्रीकृष्ण गौशाला, शाहगंज में सुबह 8 बजे गऊ माता की पूजा अर्चना होगी। प्रात:काल से ही गौ माता के लिए भंडारे का आयोजन किया गया है। उसमें हरा चारा, गुड़, चना, जौ, भुसी, भूसा, फल आदि का प्रबंध होगा। शाम 6 बजे गौ माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। मीडिया प्रभारी जगदीश जुम्मानी ने उपरोक्त जानकारी दी।
राष्ट्रीय पशु घोषित हो गाय
राष्ट्रीय सिंधु चेतना दल के मुख्य संगठक जगदीश जुम्मानी ने भारत सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। गौ हत्या करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा है कि गायों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास होना चाहिए। लोगों को अपने बच्चों के जन्म दिन पर गौ माता का भंडारा करना चाहिए।
गोपाष्टमी पर गौचारण को निकले थे श्रीकृष्ण
कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान ग्वाला बनकर गाय चराने निकले थे। इसलिए उन्हें गोपाल भी कहा जाता है। उसी समय से गोपाष्टमी का उत्सव मनाया जाने लगा।
अष्टमी की प्रात: काल गायों को स्नान कराकर गंध-पुष्पादि से उनका पूजन करें। गोपालों (ग्वालों) को अनेक प्रकार के वस्त्रालंकारों से सुशोभित कर पूजन करें। गायों को गो ग्रास देकर उनकी परिक्रमा करें। उनके साथ थोड़ी दूर साथ जाएं। इससे सभी प्रकार की अभीष्ट सिद्धि होती है। गोपाष्टमी की सायं काल को गायें जब चरकर आएं तो उस समय भी उनका पूजन कर भोजन कराएं। उनकी चरण रज को मस्तक पर धारण करे। इससे सौभाग्य की वृद्धि होती है।
अक्को गद्दी के दिनेश गुरु ने बताया कि इस दिन गाय को चारा खिलाने वालों को मुक्ति दान मिलता है। गैया नरक से पार कर स्वर्ग में ले जाती है।