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मृत्यु दर कम करने की कवायद, गंभीर संक्रमितों के इलाज को मेरठ और लखनऊ के विशेषज्ञों का 'सहारा'

Thu, 18 Jun 2020 11:33 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

एसएन मेडिकल कॉलेज में इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर सिस्टम (ईसीसीएस) का लिया जा रहा सहारा
 
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एसएन में कोविड केयर की जानकारी करते अफसर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित संक्रमितों के बेहतर उपचार के लिए अब एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक एलएलआरएम कॉलेज मेरठ और एसजीपीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं। मृत्यु दर कम करने के लिए इसे शुरू किया गया है। इसे इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर सिस्टम (ईसीसीएस) के माध्यम से किया जा रहा है।
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चिकित्सक एसएन में भर्ती मरीज की जांच रिपोर्ट, केस हिस्ट्री व हालत में सुधार नहीं होने पर दवाएं बदलने से लेकर जीवन रक्षक सलाह तक ईसीसीएस के माध्यम से एलएलआरएम कॉलेज मेरठ और एसजीपीजीआई लखनऊ के विशेषज्ञों से भेजकर सलाह लेते हैं। अब गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर नहीं किया जाएगा। 

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एसएन के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया इसके लिए एमसीएच विंग में बने कोविड आइसोलेशन सेंटर में एक कंट्रोल रूम बनाया है। वहां कंप्यूटर, स्कैनर व अन्य सुविधाएं हैं। ऐसे संक्रमित मरीज जिनकी हालत में सुधार नहीं हो रहा और उनकी जान का जोखिम अधिक है उनके संबंध में प्रदेश स्तर पर बने कोविड ट्रीटमेंट प्राइमरी हब में शामिल मेरठ और लखनऊ कॉलेज के विशेषज्ञों से राय शुमारी की जाती है।

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ऐसे होता है उपचार
इलेक्ट्रॉनिक कोविड केयर एक कंप्यूटराइज्ड सिस्टम है। ईसीसीएस के प्रभारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि इसमें 24 घंटे इंटरनेट सुविधा रहती है। इसी के माध्यम से गंभीर मरीज की प्रोफाइल, केस हिस्ट्री व रिपोर्ट्स भेजकर उस रोग के विशेषज्ञों के बताए अनुसार उपचार किया जाता है।

ये विशेषज्ञ दे रहे सेवाएं
- वेंटिलेटर पर भर्ती गंभीर मरीजों के लिए एनेस्थीसिया विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं।
- फेफड़ों में संक्रमण, सांस समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए पल्मोनरी विशेषज्ञ हैं।
- जिन मरीजों पर दवाएं बेअसर हो रहीं हैं उनके लिए मेडिसिन विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
- आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं।

इससे मृत्यु दर में कमी आएगी
ऐसे मरीज जो बीमार हैं और संक्रमित हो गए हैं। उनके इलाज के लिए ईसीसीएस व्यवस्था शुरू कराई है। इससे मृत्यु दर में कमी आएगी। गंभीर मरीजों को बचाया जा सकेगा। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी
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