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राजा मानसिंह हत्याकांड: 35 साल पुराने मामले पर फैसले की घड़ी, कोर्ट परिसर में हुई सुरक्षा कड़ी

Tue, 21 Jul 2020 12:29 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा

सार

  • 14 अभियुक्तों पर होगा निर्णय, कोर्ट परिसर में चाक चौबंद की गई सुरक्षा
  • पुलिस एनकाउंटर में हुई थी राजा मान सिंह समेत तीन लोगों की मौत 
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राजा मान सिंह का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के बहुचर्चित भरतपुर के राजा मान सिंह समेत तीन लोगों की हत्या के मामले में मंगलवार को फैसला आ सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 35 साल पुराने इस मुकदमे की सुनवाई मथुरा जिला जज की अदालत में हो रही है। इसमें 14 पुलिसकर्मी ट्रायल पर हैं। बहुचर्चित मामले को देखते हुए पुलिस ने अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर ली है। 
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घटना 21 फरवरी 1985 की है। उस वक्त राजस्थान में चुनावी माहौल था। डीग विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय उम्मीदवार राजा मान सिंह अपनी जोगा जीप लेकर चुनाव प्रचार के लिए लाल कुंडा के चुनाव कार्यालय से डीग थाने के सामने से निकले थे। पुलिस ने उन्हें घेर लिया था। ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी थी। घटना में राजा मान सिंह, उनके साथ सुम्मेर सिंह और हरी सिंह की मौत हो गई थी। उनके शव जोगा जीप में मिले थे। 



इस वारदात के बाद डीग थाना के एसएचओ वीरेंद्र सिंह ने राजा मान सिंह के दामाद विजय सिंह सिरोही के खिलाफ 21 फरवरी को ही धारा 307 की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि राजा मान सिंह के दामाद और उनके साथी बाबूलाल को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसी रात उनकी जमानत भी हुई और 22 फरवरी को राजा मान सिंह का दाह संस्कार महल के अंदर ही किया गया। 
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पुलिसकर्मियों पर लगाया था हत्या का आरोप

23 फरवरी को दामाद विजय सिंह सिरोही ने डीग थाने में राजा मान सिंह और दो अन्य की हत्या का मामला दर्ज कराया। इसमें सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेंद्र सिंह समेत कई पुलिसकर्मी आरोपी थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता नंद किशोर उपमन्यु ने बताया कि तीन-चार दिन में यह मामला सीबीआई के सुपुर्द  कर दिया गया। सीबीआई ने हत्या से पूर्व दर्ज हुए मुकदमों में एफआर लाग दी। 

हत्या का मामला जयपुर की सीबीआई की विशेष अदालत में चला। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुकदमा वर्ष 1990 में मथुरा न्यायालय स्थानांतरित हो गया। गौरतलब रहे कि हत्याकांड से एक दिन पहले 20 फरवरी 1985 को राजा मान सिंह के खिलाफ राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर का हेलीकॉप्टर और मंच को तोड़े जाने की एफआईआर दर्ज की गई थी। 

78 गवाही के बाद मुकर्रर हो सकी निर्णय की तारीख

पूरे केस में 61 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर  से तथा 17 गवाह बचाव पक्ष की ओर से पेश किए गए। जिनमें से बहुत से गवाह चश्मदीद भी थे। तारीख पर तारीख पड़ने  के बाद निर्णय की तारीख  तय हो सकी। 78 गवाही के बाद निर्णय की तारीख मुकर्रर हो सकी। 
 
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तीन अभियुक्तों की हो चुकी है मौत, एक बरी

राजा मान सिंह हत्याकांड में सीबीआई द्वारा कुल  18 अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दी है। इनमें से तीन अभियुक्त एएसआई नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है, जबकि कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र सिंह को जिला जज की अदालत ने बरी कर दिया है। अब जो अभियुक्त रह गए हैं उनमें सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेन्द्र सिंह, कांस्टेबल  सुखराम, कांस्टेबल आरएसी जीवन राम, भावर सिंह, हरी सिंह, शेर सिंह, छत्तर सिंह, पदम राम, जग मोहन, एएसआई डीग पुलिस रवि शेखर, जीडी लेखक हरि किशन, जांचकर्ता कान सिंह सिरवी, गोविंद सिंह सहायक जांचकर्ता शामिल हैं। अधिकतर अभियुक्तों  की उम्र  लगभग 80 के पार पहुंच  गई है । जिससे उन्हें अब तारीखों पर भी आने में तकलीफ का सामना करना पड़ता है। जबकि सभी अभियुक्त सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।  

एसपी सिटी ने सुरक्षा की समीक्षा की

फैसले से पहले न्यायालय की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है। न्यायालय के आसपास और परिसर में करीब डेढ़ सेक्शन पीएसी तथा पुलिस बल तैनात किया है। एसपी सिटी उदय शंकर सिंह ने सोमवार को सुरक्षा संबंधी समीक्षा की। एसपी सिटी ने बताया कि न्यायालय को पूरी तरह से सुरक्षित किया गया है। पुलिस और पीएसी तैनात की गई है।
 
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