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UP: तहसीलदार राखी शर्मा और जिलाधिकारी रमेश रंजन का विवाद, 20 जून को कोर्ट में सुनवाई; तलब की गई रिपोर्ट

Sat, 13 Jun 2026 09:55 AM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

तत्कालीन तहसीलदार राखी शर्मा ने पूर्व जिलाधिकारी रमेश रंजन और अन्य पर भ्रष्टाचार, प्रताड़ना और जबरन वसूली के आरोप लगाते हुए अदालत में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। मामले में न्यायालय ने डीआईजी और मंडलायुक्त से रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई 20 जून तय की है।
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तहसीलदार राखी शर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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फिरोजाबाद के पूर्व जिलाधिकारी रमेश रंजन और तत्कालीन तहसीलदार टूंडला राखी शर्मा के बीच विवाद गहरा गया है। राखी शर्मा ने आगरा न्यायालय में रमेश रंजन और अन्य पर भ्रष्टाचार, प्रताड़ना और जबरन वसूली का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। न्यायालय ने इस मामले में डीआईजी और मंडलायुक्त से रिपोर्ट तलब की है।
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यह विवाद दोनों अधिकारियों के तबादले के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। शुक्रवार को मंडलायुक्त के पेशकार ने अदालत में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। डीआईजी की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मृदुल दुबे ने पिछली तारीख पर रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जून को होगी।

रमेश रंजन वर्तमान में लखनऊ में अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, राजस्व परिषद के पद पर तैनात हैं। राखी शर्मा भी राजस्व परिषद लखनऊ से संबद्ध हैं। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय, फिरोजाबाद के ओएसडी शैलेंद्र शर्मा, वरिष्ठ लिपिक राजेंद्र खन्ना, अजीत उपाध्याय और दोजी राम के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
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तहसीलदार ने लगाए गंभीर आरोप
राखी शर्मा 4 सितंबर, 2024 से 16 अप्रैल, 2026 तक तहसीलदार टूंडला के पद पर कार्यरत थीं। उनका आरोप है कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने अवैध धन अर्जित करने के उद्देश्य से अपने स्टाफ की एक टीम बनाई थी। इस टीम में अन्य आरोपी कर्मचारियों को शामिल किया गया था। ये सभी जनपद की तहसीलों, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और विकास विभाग के अधिकारियों को बिना उचित कारण नोटिस जारी करते थे और वेतन रोकने के आदेश भी जारी करा देते थे। आरोप लगाया कि अधिकारियों को ब्लैकमेल कर वसूली की जाती थी। उनसे भी अवैध धन की मांग की गई, जिसे मना करने पर उन पर आईजीआरएस प्रार्थनापत्रों के गलत निस्तारण का आरोप लगा। वेतन रोक दिया गया, महीनेदारी देने का दबाव बनाया गया। उन्हें जिलाधिकारी को आईफोन देने और उनके घर जाने के लिए भी कहा गया ताकि वेतन जारी हो सके।
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