सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पाया कि अभियुक्त के खिलाफ कई वर्षों से गैर जमानती वारंट जारी हो रहे हैं। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत भी वारंट जारी हुए थे। जमानतदारों प्रेम सिंह और वीरबल को भी नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन इनकी तामील रिपोर्ट थाने से वापस नहीं मिली।
एनडीपीएस अधिनियम के 15 साल पुराने मामले में अभियुक्त और उसके जमानतदारों के खिलाफ अदालत से जारी वारंट और नोटिस तामील नहीं हुए। इससे मुकदमे का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस पर एडीजे-13 महेश चंद्र वर्मा ने शाहगंज थाना प्रभारी को अदालत में 8 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दे दिए।
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अदालत में सुनवाई के दौरान कई वर्षों से एनडीपीएस अधिनियम का अभियुक्त राजेश उर्फ राजकुमार बार-बार पुकारने पर भी अनुपस्थित रहा। मामला अदालत में लंबित सबसे पुराने वादों में से एक है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय ने पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पाया कि अभियुक्त के खिलाफ कई वर्षों से गैर जमानती वारंट जारी हो रहे हैं। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत भी वारंट जारी हुए थे।
जमानतदारों प्रेम सिंह और वीरबल को भी नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन इनकी तामील रिपोर्ट थाने से वापस नहीं मिली। अदालत ने थानाध्यक्ष को चेतावनी दी है कि यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 8 जुलाई से पहले अभियुक्त को गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। जमानतदारों के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 के तहत नोटिस तामील कराने के लिए भी कहा गया है।