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UP: तीन बार दबाई गई फाइल, लेकिन नहीं हारा वादी; 12 साल पुराने केस में कोर्ट ने फिर दिए जांच के आदेश

Wed, 18 Feb 2026 09:57 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के थाना न्यू आगरा में वर्ष 2013 में दर्ज हुई प्राथमिकी के मामले में तीन बार एफआर लगाकर फाइल को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन वादी ने हार नहीं मानी। कोर्ट ने पुलिस को फिर जांच के आदेश दिए हैं। 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के थाना न्यू आगरा में वर्ष 2013 में धोखाधड़ी और अन्य धाराओं के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी में पुलिस ने तीन बार एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर मामले को दबाने की कोशिश की , लेकिन वादी की लगातार पैरवी रंग लाई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-6 आतिफ सिद्दीकी ने वादी की आपत्ति पर पुलिस की एफआर निरस्त करते हुए थानाध्यक्ष न्यू आगरा को फिर से अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।
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कमला नगर निवासी कांता प्रसाद अग्रवाल ने वर्ष 2013 में राकेश गर्ग आदि के खिलाफ थाना न्यू आगरा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उनकी कंपनी को हड़पने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि 26 जून 2014 को विवेचक ने आरोपियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बिना जांच किए एफआर लगा दी। वादी के आपत्ति करने पर अदालत ने फिर विवेचना के आदेश दिए थे। दूसरे विवेचक ने पहले की विवेचना का समर्थन करते हुए 28 मार्च 2016 को एफआर लगा दी, लेकिन वादी ने पैरवी करना बंद नहीं किया।

उन्होंने फिर से आपत्ति की। 29 अक्तूबर 2016 को मामले की जांच अपराध शाख को दी गई। अपराध शाख के विवेचक ने अपराध का होना स्पष्ट किया था। इसके बावजूद भी तीसरे विवेचक ने भी कुछ पर्चे काटने के बाद 9 मार्च 2017 को एफआर लगा दी थी। मामले को बंद करने का प्रयास किया। वादी ने हार नहीं मानी और लगातार अदालत में पैरवी जारी रखी। अदालत थाना न्यू आगरा को दिए गए आदेश में स्पष्ट किया है कि मामले की नए सिरे से और निष्पक्ष विवेचना की जाए। उम्मीद है कि इस अग्रिम विवेचना से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
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