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मंजूर करने से पहले रोकी गई 47 एफआर

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मैनपुरी। आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं होने पर पुलिस द्वारा लगाई गई आधी अधूरी 47 एफआर (फाइनल रिपोर्ट) कोर्ट में मंजूर होने से पहले रोक दी गई हैं। पीड़ित का पक्ष जानने केे लिए रिपोर्ट लिखाने वालों को नोटिस भेजे गए हैं। पीड़ित द्वारा कोर्ट में अपना पक्ष रखने केे बाद ही फाइनल रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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आपराधिक मामलों में रिपोर्ट लिखाए जाने के बाद घटना की पुष्टि नहीं होने पर पुलिस फाइल बंद करके एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाती है। फाइल बंद करने के बाद पुलिस एफआर को कोर्ट में मंजूरी के लिए भेजती है। पुलिस द्वारा लगाई गई आधी अधूरी 47 एफआर को कोर्ट ने मंजूर करने से पहले रोक दिया है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर सुनवाई करने से पहले पीड़ित पक्ष की ओर से रिपोर्ट लिखाने वालों को नोटिस भेजे हैं। नोटिस में पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर पीड़ित को कोर्ट में अपना पक्ष रखने को कहा गया है। कोर्ट द्वारा तय की गई समय सीमा में ही पीड़ित को अपना पक्ष कोर्ट में रखना होगा। पीड़ित पक्ष को सुनने के बाद ही कोर्ट पुलिस द्वारा लगाई गई एफआर पर अंतिम निर्णय लेगी।
विवेचक से भी मांगा गया जवाब
पुलिस द्वारा लगाई गई जिन एफआर को कोर्ट में मंजूरी देने से पहले रोका गया है। उनमें विवेचक से भी जवाब मांगा गया है। विवेचक को पीड़ित द्वारा लगाई गई रिपोर्ट पर लगाई गई एफआर के कारण को कोर्ट में स्पष्ट करना है। विवेचक के जवाब के बाद ही एफआर को कोर्ट में मंजूरी दी जाएगी।
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केस-एक
थाना औंछा में नवंबर 2019 में राजेंद्र सिंह ने घर में घुसकर चोरी करने की रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने चोरी का खुलांसा नहीं होनेे पर फाइल बंद करके फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट में मंजूरी के लिए भेज दी। सीजेएम कोर्ट में एफआर मंजूर करने से पहले रोक दी गई है।
केस-दो
थाना बिछवां में रामप्रकाश सिंह ने जनवरी 2020 में खेत पर लगे नलकूप का सामान चोरी होने की रिपोर्ट लिखाई। पुलिस जांच में चोरी का खुलासा नहीं कर सकी। फाइल बंद करके एफआर लगाकर कोर्ट में भेज दी। आधी अधूरी एफआर होने पर कोर्ट में एफआर रोकी गई है।
कारण स्पष्ट होना चाहिए
थाने में लिखाई गई रिपोर्ट में घटना का खुलासा नहीं होने पर पुलिस को एफआर में कारण स्पष्ट करना चाहिए। वादी और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच करनी चाहिए। पीड़ित को सुनने के बाद ही एफआर लगानी चाहिए।
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सुभाषचंद्र यादव, पूर्व डीजीसी
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