प्रदेश में चल रहे सजा दिलाओ अभियान के तहत 45 साहसी गवाहों को सम्मानित किया जाएगा। ये ऐसे गवाह हैं जिनके बयान पर मुजरिमों को सजा ए मौत मिली है। इन बहादुरों में तीन आगरा रेंज के हैं। इनके सम्मान में 26 जनवरी को लखनऊ में समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें इन्हें शॉल और प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। साथ ही शानदार पैरवी के लिए इन मामलों के अभियोजन अधिकारियों को भी ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाएगा।
अभियोजन निदेशालय ने यह अभियान 12 जुलाई को शुरू किया था। इसके नतीजे शानदार रहे हैं। अकेले आगरा में ही अभी तक 557 मामलों में 676 आरोपियों को दस वर्ष से कम और 68 केस में 173 आरोपियों को दस वर्ष से अधिक की सजा हो चुकी है। 6081 की जमानत भी खारिज हुई हैं। इसके लिए पिछले दिनों अभियोजन के संयुक्त निदेशक राजेश कुमार सक्सेना और विशेष अभियोजन अधिकारी विजय शंकर मिश्रा को ट्रॉफी मिली है।
इसी की अगली कड़ी में 26 जनवरी को गवाहों को सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए 2013 से 2015 तक के ऐसे मामले लिए गए हैं जिनमें मुजरिमों को सजा ए मौत सुनाई गई। प्रदेश में ऐसे 45 केस पाए गए हैं। इनमें तीन आगरा रेंज के हैं। एक फीरोजाबाद और दो मैनपुरी के। फीरोजाबाद के रामगढ़ में 27 अक्तूबर 2008 की रात लूटपाट के दौरान निर्दोष देवी (40), उनकी भतीजी पूनम (18), भतीजा आशीष (12) और भतीजे अंशुल (10) की हत्या कर दी गई थी। भतीजे उज्ज्वल (07) को बदमाश मृत समझकर छोड़ गए थे। केस में मासूम उज्ज्वल की गवाही सबसे अहम साबित हुई।
इसमें 13 जुलाई 2015 को मुजरिम हरिओम उर्फ हीरो को सजा ए मौत सुनाई गई।उसके साथी रिजवान, हसीन, भइये उर्फ फरीद उर्फ रफीक, संजय उर्फ सोनू और सोनू को उम्रकैद की सजा दी गई। 26 जनवरी को उज्ज्वल को सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह मैनपुरी के करहल के रेप और हत्या के मामले में संतोष को फांसी की सजा मिली। इसमें विनोद की गवाही सबसे अहम रही। उसे भी सम्मानित किया जाएगा। मैनपुरी में ही रेप और हत्या के मामले में नौ जुलाई 2013 को सतीश दुबे को मृत्युदण्ड दिया गया। इसमें मृतक महिला के पति की गवाही अहम रही। आगरा रेंज के संयुक्त निदेशक अभियोजन प्रबोध त्रिवेदी ने बताया कि सम्मानित किए जाने वाले गवाहों को सूचना भिजवाई जा रही है।
-- गवाहों की सुरक्षा के लिए बनेगी कमेटी
आगरा। अभियोजन निदेशालय गवाहों की सुरक्षा के लिए जिला स्तरीय कमेटी गठित करने जा रहा है। इसकी घोषणा 26 जनवरी को हो सकती है। इसके लिए सभी अभियोजन अधिकारियों को सुझाव मांगे गए हैं। इस कमेटी में पुलिस, प्रशासन और अभियोजन के अधिकारियों के अलावा पीड़ित और गवाह भी रखे जाएंगे। कमेटी का काम उन गवाहों को सुरक्षा मुहैय्या कराना होगा, जिन्हें किसी भी तरह का खतरा हो।