आगरा के थाना ताजगंज में तैनात रहे तीन दरोगा सहित सात पुलिसकर्मियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इन सभी को गिरफ्तार करके पेश किया जाए। इनके खिलाफ लूट और अपहरण का केस दर्ज है। इसमें वारंट जारी होने पर भी कोर्ट के सामने पेश नहीं हुए।
मामला सितंबर 2014 का है। सभी आरोपी उस समय ताजगंज थाना में तैनात थे। मधुर मिश्रा थानाध्यक्ष थे। इनके खिलाफ एफआईआर आवास विकास सेक्टर सात के मुन्ना लाल ने 27 सितंबर 2014 को दर्ज कराई थी।
आरोप है कि ये लोग मुन्ना के घर में घुसे, लूटपाट की, उसका अपहरण कर ले गए। इसके बाद मुन्ना पर कई थानों में केस दर्ज कराए थे। मुन्ना का कहना था कि कांस्टेबल महेश चंद उसका मकान खरीदना चाहता था।
यह है आरोप
उसने मना किया तो दबाव डाला। वह फिर भी नहीं माने तो साथी पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर खेल किया। उसके घर में लूट की, उसका अपहरण किया और उस पर फर्जी केस दर्ज करा दिए। उसे चोरों के गिरोह का सदस्य बताया, वह जेल में रहा।
जेल से आने केबाद उसने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, तब केस दर्ज हुआ। इसके बाद आरोपी कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। पहले सम्मन, फिर वारंट जारी हुए। केस अपर जिला जज भूपेंद्र राय की कोर्ट में है। उन्होंने हरीपर्वत थाना पुलिस के आदेश दिए हैं कि आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए।
पुलिस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
पहले तो पुलिस मुन्ना लाल की तहरीर रिसीव करने को तैयार नहीं थी। कोर्ट के आदेश पर केस दर्ज किया तो उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मुन्ना लाल ने इसे चैलेंज किया। स्पेशल जज राम नरेश मौर्य ने फाइनल रिपोर्ट निरस्त कर दी। यहां से स्थानांतरित किए जाने पर केस भूपेंद्र राय की कोर्ट में पहुंचा।
ये हैं आरोपी
उप निरीक्षक मधुर मिश्रा, उप निरीक्षक मनोज शर्मा, उप निरीक्षक संजीव त्यागी, हैड मोहर्रिर आरके सिंह, कांस्टेबल इमामुद्दीन, महेश चंद और जगवीर।