आगरा की विशेष पॉक्सो अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में साक्ष्य के अभाव, मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि न होने और पीड़िता के बयानों में विरोधाभास के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका।
आगरा में सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने और पीड़िता के बयान में विरोधाभास दिखा। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनिका चौधरी ने साक्ष्य के अभाव में थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के निवासी राकेश और अवधेश को बरी करने का आदेश दिया।
थाना एत्माद्दौला में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार किशोरी के पिता ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 13 अक्तूबर 2020 की रात परिजन संग घर पर सो रहे थे। रात 11 बजे आरोपी राकेश उनकी पुत्री को अपने घर ले गया और दुष्कर्म किया। विवेचना में आरोपी अवधेश का नाम बढ़ाया गया। उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से पीड़िता सहित छह गवाह अदालत में पेश किए गए।
पीड़िता के पिता का आरोप था कि आरोपी राकेश ने उनकी पुत्री को घर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जबकि पीड़िता ने कहा 13 अक्तूबर को वह घर में सो रही थी। रात को लघु शंका के लिए घर से बाहर आई थी। आरोपी राकेश और अवधेश घर के बाहर खड़े थे। आरोपियों ने भाई और पिता को जान से मारने की धमकी देकर कपड़ा सूंघा दिया था। बेहोशी की हालत में उठा ले गए। तब उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता का मेडिकल करने वाली डॉक्टर ममता किरन ने अपनी रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं की।