आगरा नगर निगम में वर्कशॉप घोटाले पर सदन में पार्षदों ने हंगामा किया। दरअसल काम किए बिना ही भुगतान करने का मामला है। इस दौरान पार्षदों ने चीफ इंजीनियर पर सवाल उठाए।
उत्तर प्रदेश के आगरा में नगर निगम सदन में बुधवार को पार्षदों ने विकास और वर्कशॉप में घोटाले के आरोप लगाते हुए हंगामा काटा। पार्षदों ने विकास कार्य अधूरे होने पर भी ठेकेदार को भुगतान करने और एमएनटी वर्कशॉप में फॉगिंग के टेंपो को डीजल आवंटन में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
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इसके बाद मेयर ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है जो सदन में रिपोर्ट पेश करेगी। भाजपा और बसपा के पार्षदों के बीच शहर की सफाई, कोठी मीना बाजार का नाम सीता वाटिका रखने समेत कई प्रस्तावों को लेकर तकरार होती रही, जिसमें दोनों ने जमकर नारेबाजी और हंगामा किया।
बुधवार को पूर्वाह्न 11 बजे से शुरू हुए नगर निगम सदन के तीसरे अधिवेशन में पार्षद यशपाल सिंह ने काम पूरा न होने और बोर्ड लगाने के साथ भुगतान किए जाने का सवाल उठाया। उन्होंने कई फोटो सदन में लहराए, जिसमें कहा गया कि काम हुए बिना ही भुगतान कर दिया गया है।
इस पर मेयर ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और पार्षद का कार्य पूर्ण होने संबंधी पत्र लगाने के बाद ही भुगतान होंगे। चीफ इंजीनियर बीएल गुप्ता की एक टिप्पणी पर पार्षद भड़क गए और बताया कि ऐसा प्रस्ताव पूर्व में पारित हो चुका है, पर निगम के इंजीनियर पार्षदों से लिखवाकर नहीं लेते।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई
पार्षद बंटी माहौर ने एमएनटी वर्कशॉप में फॉगिंग के 14 टेंपो पर 700 लिटर डीजल हर दिन खर्च होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 20 करोड़ रुपये डीजल पर फूंक रहे हैं, पर फॉगिंग कागजों में ही सीमित है। पार्षद हेमंत प्रजापति ने सुझाव दिया कि एक टेंपो में 45 लीटर डीजल भरवाकर वह उसमें बैठकर पूरे दिन घूमने के लिए तैयार हैं।
ऐसा करके देखेंगे कि टेंपो कितने किमी तक चलता है। इस मामले में पार्षदों की मांग पर मेयर ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है, जो जांच करके अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। बंटी माहौर ने मैं भी चौकीदार की टिप्पणी की, जिस पर भाजपा पार्षदों ने आपत्ति जताई और हंगामा काटा।
239 करोड़ खर्च, सफाई में जीरो
पार्षद अनुराग चतुर्वेदी ने सदन में कहा कि नगर निगम सफाई, इसमें लगे वाहनों का डीजल और वेतन आदि पर 239 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रहा है। सुपरवाइजर काम करते नहीं और सेनेटरी इंस्पेक्टर फील्ड में घूम नहीं रहे। इंदौर का मॉडल अपनाने की जगह उन्होंने आगरा मॉडल बनाने के लिए कहा। पार्षद शरद चौहान ने कहा कि गलियों में सफाई नहीं हो रही।
अधिकारियों को मॉनिटरिंग की जिमेदारी दी जाए। सफाई कर्मचारियों को ड्राइवर बनाकर रखा गया है। बंटी माहौर ने कहा कि जब गाड़ियां ट्रेवल्स से किराए पर आई हैं तो अधिकारी सफाई कर्मचारियों को ड्राइवर क्यों बनाए हुए हैं। इस पर नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने सदन में कहा कि जितने भी सफाई कर्मचारी ड्राइवर बने हुए हैं, वह सभी मूल काम के लिए भेजे जाएंगे।