पंचायतराज विभाग में ग्राम पंचायतों के विकास का जिम्मा संभालने वाले सचिव अपनी मनमानी चला रहे हैं। उन्हें न तो शासन के आदेशों कोई डर है और न ही वे प्रशासनिक अधिकारियों की बात मानते हैं। 13 ग्राम पंचायतों के सचिवों ने घर बैठकर 24.63 लाख रुपये का भुगतान कर ये बात पुख्ता कर दी है। शासन ने आईपी एड्रेस ट्रेस कर यह मामला पकड़ा है। इन ग्राम पंचायतों की सूची कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को भेजी गई है।
विज्ञापन
ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सभी सचिवों को पंचायत सचिवालय में लगे कंप्यूटर पर उपलब्ध गेटवे सॉफ्टवेयर से भुगतान करने के आदेश हैं। लेकिन ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव के लिए ये आदेश बेमानी हैं। तभी 11 दिसंबर से 31 दिसंबर तक जिले की 13 ग्राम पंचायतों में सचिवों ने घर बैठकर कुल 41 वाउचर के माध्यम से कुल 24.63 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।
पंचायतीराज निदेशालय ने आईपी एड्रेस से सचिवों की इस कारगुजारी को पकड़ा। जिला प्रशासन को पत्र भेजकर संबंधित सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। इससे खलबली मच गई है। कुल 15 विकास खंडों में से 8 विकास खंडों में ये खेल किया गया। इसमें विकास खंड बरौली अहीर की कुठावती ग्राम पंचायत ने 3.29 लाख रुपये का और कुआंखेड़ा ने 5.01 लाख रुपये का भुगतान किया। इसी तरह एत्मादपुर की नयाबांस ग्राम पंचायत में 3.83 लाख, खेरागढ़ की ग्राम पंचायत बिधौली खैरागढ़ ने 2.78 लाख रुपये का और सैंया की ग्राम पंचायत सोनारा ने 7.06 लाख रुपये का भुगतान किया।
किया गेटवे से बाहर भुगतान
फतेहपुर सीकरी की मंडी मिर्जा खान, सैंया की चैतपुर मोतीपुरा, बाह की बासोनी व गुंगावटी, बरौली अहीर की लोधई, बिचपुरी की मोहम्मदपुर, शमसाबाद की लहरा और मुजफ्फरपुर के पंचायत सचिवों ने भी गेटवे से बाहर जाकर घर बैठकर कई भुगतान किए।
ये है नियम
दो साल पहले सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिवालय स्थापित कर वहां कंप्यूटर भी लगवाया गया था। इस कंप्यूटर में पंचायतराज विभाग ने भुगतान के लिए गेटवे सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया था। हर हाल में इसी कंप्यूटर के माध्यम से गेटवे के तहत विकास कार्यों के भुगतान किए जाने के आदेश हैं। किसी अन्य कंप्यूटर या गेटवे से बाहर भुगतान पर कार्रवाई का भी प्रावधान है।
पोल खुलने का बना डर
पंचायत सचिवालय में लगे कंप्यूटर से भुगतान न करने के पीछे भी एक पूरी योजना है। शासन ने पंचायत सचिवालयों के संचालन के लिए पंचायत सहायकों को तैनात किया है। उनकी मौजूदगी में उनकी ओर से ही सभी कार्यों का संचालन किया जाना है। पंचायत सहायक संबंधित ग्राम पंचायत का ही मूल निवासी होता है। ऐसे में अगर पंचायत सहायक के सामने पंचायत सचिवालय के कंप्यूटर से भुगतान किया जाता है तो उसे पता चल जाएगा कि किन-किन कामों का भुगतान किया गया है। ये काम वास्तव में हुए भी हैं या नहीं। इससे फर्जी भुगतान की पोल खुलने का डर बना रहता है।
सचिवों को जारी किया है नोटिस
जिला पंचायतराज अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि शासन ने गेटवे से बाहर भुगतान करने वाली ग्राम पंचायतों की सूची उपलब्ध कराई थी। इसी के आधार पर संबंधित पंचायत सचिवों को नोटिस जारी किया गया है। जवाब आने के बाद उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।