दिवाली पर संक्रमण की दर रोकने को फोकस सैंपलिंग 29 अक्तूबर से 12 नवंबर तक चली। इसमें मिष्ठान भंडार, गिफ्ट शॉप, शोरूम, इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान, मॉल, वाहन शोरूम, मूर्ति-दीपक बेचने वाले, ब्यूटीपार्लर के मालिक और कर्मचारियों की जांच कराई गई। 14835 की जांच में 101 पॉजिटिव मिले। औसत हर 146वां मरीज संक्रमित मिला।
इन बस्तियों में लगाए थे शिविर
पीर कल्याणी, फ्रीगंज रोड, मोतीलाल नेहरू रोड से जीवनीमंडी, नया घेर, कोयला बस्ती, नुनिहाई, सीता नगर, कटरा वजीर खां, सिकंदरा बस्ती, खंदारी चौक, ट्रांसपोर्ट नगर, हलवाई की बगीची, सुभाष पुरम, पत्थर घोड़ा, सेक्टर चार, देवरी रोड, मायापुरी, नंदपुरा, टुंडपुरा, नगला जस्सा, राजनगर, सिरकी मंडी, नया बांस, नौबस्ता, खातीपाड़ा, खतैना, बिल्लोचपुरा, कारवां, बेसन की बस्ती, घ्यासपुरा, प्रकाश नगर, शंकर कॉलोनी, नगला तेजा, नगला डिग्गी, नगला मोहन में शिविर लगाए गए थे।
इसलिए मलिन बस्तियों में कम है संक्रमण
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. आरसी पांडेय ने बताया कि अभी तक कुल नमूनों की जांच का औसत देखें तो उसके मुकाबले मलिन बस्तियों में संक्रमण की दर बहुत कम है। इसकी एक वजह लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने, मधुमेह-उच्च रक्तचाप की परेशानी कम होना हो सकती है।
सैंपलिंग के नोडल प्रभारी डॉ. नरेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि पॉश कॉलोनियों के मुकाबले मलिन बस्तियों में कोरोना वायरस के नमूना देने वालों की संख्या बहुत ही कम रही। लोगों की काउंसिलिंग भी की, पॉश कॉलोनियों में जांच कराने की दर काफी अधिक है।
कई तरह के संक्रमण से एंटीबॉडीज बन जाती हैं: डॉ. पचौरी
आईएमए के डॉ. आरएम पचौरी ने बताया कि मलिन बस्तियों रहने वाले लोगों में कई तरह के बैक्टीरियल इन्फेक्शन के शिकार हो जाने से उनमें एंटीबॉडीज बन जाती हैं। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे संक्रमण कम मिल रहा है।