कोरोना वायरस के मद्देनजर ट्रेनों में सफर करने से लोग कतरा रहे हैं। शताब्दी और गतिमान एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में वेटिंग खत्म हो गई है। एक सप्ताह में आगरा मंडल के 60 हजार से अधिक यात्रियों ने अपने रिजर्वेशन निरस्त कराए हैं। यात्रियों को 2,72,25,219 रुपये का रिफंड किया गया है। यही हालात रहे तो रेलवे कुछ ट्रेनों को निरस्त कर सकता है।
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कोरोना वायरस से बचाव के लिए आगरा व आसपास के यात्री लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर रहे हैं। स्टेशनों पर सुबह से ही टिकट खरीदने वालों से ज्यादा लंबी लाइन टिकट निरस्त कराने वालों की लग रही है। आगरा होकर गुजरने वाली शताब्दी एक्सप्रेस और गतिमान एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में आगरा से सीट मिलना मुश्किल होता था, लेकिन चार दिन से इन प्रीमियम ट्रेनों में भी वेटिंग नहीं है।
कमला नगर के दीपक गुप्ता ने बताया कि उन्होंने शिरडी की यात्रा निरस्त कर दी है। वह हर साल होली के बाद वहां पहुंचते थे। बेलनगंज के राजेश ने बताया कि उन्होंने बंगलुरु की यात्रा निरस्त कर दी है। उन्हें व्यापार के सिलसिले में जाना था।
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पिछले साल 23 हजार यात्रियों ने करवाए थे निरस्त
2019 में 11 से 18 मार्च के बीच 23237 यात्रियों ने आरक्षण निरस्त करवाए थे। इन यात्रियों को 12070067 रुपये रिफंड दिया गया था।
तारीख निरस्त कराने वाले यात्री रिफंड (रुपये में)
11 मार्च 18175 2550293
12 मार्च 6806 3202483
13 मार्च 8345 3914320
14 मार्च 9984 4468288
15 मार्च 7440 3391819
16 मार्च 10969 4913844
17 मार्च 11480 4784172
ट्रेनों के साथ ही वातानुकूलित बसों में भी यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। आईएसबीटी से प्रतिदिन 27 एसी बसों का संचालन किया जाता है, लेकिन एक सप्ताह के अंदर आगरा से देहरादून, नोएडा, लखनऊ, बरेली की एसी बसें निरस्त की जा रही हैं। साधारण बसों में भी सवारी कम निकल रही हैं।
आईएसबीटी से आगरा से लखनऊ, कानपुर, देहरादून, नोएडा, बरेली, जयपुर, दिल्ली रूट की एसी बसें संचालित हैं। एसी बसों में सवारी नहीं मिल पा रही हैं। इस कारण चालक, परिचालक समेत अनुबंधित बसों के मालिक भी परेशान हैं। बुधवार को देहरादून की वोल्वो एसी बस को पांच से कम सवारियां होने के कारण निरस्त किया गया था। इसी तरह रोजाना तीन से चार बसों को निरस्त किया जा रहा है।
ईदगाह बस स्टैंड से जयपुर, जोधपुर, भरतपुर जाने वाली बसों में भी सवारियां कम मिल पा रही हैं। उधर, बसों को सैनिटाइज करने, चालक, परिचालकों को मास्क, सैनिटाइजर देने के कारण बसों के संचालन का खर्च बढ़ गया है, लेकिन इस अनुपात में सवारियां नहीं मिल पा रही हैं।
एसी बसों में सवारियां नहीं मिल रहीं: एसएम
वातानुकूलित बसों में पहले जहां आनलाइन बुकिंग के कारण सीटें मिलना मुश्किल होता था, एक सप्ताह से इन बसों में किसी भी दिन50 सवारी नहीं हुई हैं। दस से 15 सवारी होने पर भी बसों को रूट पर भेजा जा रहा है। - एसपी सिंह, सेवा प्रबंधक, आगरा परिक्षेत्र