मैनपुरी। कोरोना काल में विभागीय बजट के अलावा स्वास्थ्य विभाग को मिली धनराशि का अब ऑडिट किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि किस आधार पर और कहां-कहां इस धनराशि को खर्च किया गया है। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ने दो सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
जिले के लोगों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग को अपनी निधि से 1.20 करोड़ की धनराशि दी थी। इसका उपयोग उपकरण खरीदने या अन्य कार्यों में करने के लिए कहा गया था। इसमें सांसद मुलायम सिंह यादव, सदर विधायक राजकुमार यादव और विधायक करहल सोबरन सिंह यादव ने 25-25 लाख रुपये दिए थे।
साथ ही उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री, किशनी विधायक बृजेश कठेरिया और एमएलसी अरविंद यादव ने 10-10 लाख रुपये दिए थे। मथुरा से एमएलसी उदयवीर सिंह ने जिले को पांच लाख की धनराशि दी थी। स्वास्थ्य विभाग के पास पहले से ही पर्याप्त धनराशि होने के चलते इस धनराशि के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है। इसे देखते हुए मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। ये समिति स्वास्थ्य विभाग में निधि से खरीदे गए सामान और धनराशि का ऑडिट करेगी।
इन्हें किया गया ऑडिट समिति में शामिल
मुख्य विकास अधिकारी की ओर से बनाई गई ऑडिट समिति में दो अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसमें परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण और लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा अनिल कुमार शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी गई। समिति के मांगने पर सभी अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय को भी पत्र भेजा गया है।
राज्यसभा सदस्य ने वापस ले ली थी धनराशि
कोरोना संक्रमण के दौरान सबसे पहले राज्यसभा सदस्य हरनाथ सिंह यादव मदद के लिए आगे आए थे। उन्होंने सीएमओ को 25 लाख रुपये की धनराशि दी थी। इस धनराशि से उन्होंने वेंटीलेटर या अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपकरण खरीदने के लिए कहा था। जब दो माह तक स्वास्थ्य विभाग ने धनराशि खर्च नहीं की तो उन्होंने धनराशि वापस मांग ली।
कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग को जनप्रतिनिधियों की निधि से 1.20 करोड़ की धनराशि मिली है। इस धनराशि का सही प्रयोग हुआ है या नहीं ये जानने के लिए ऑडिट कराया जाएगा। ईशा प्रिया, मुख्य विकास अधिकारी।