सोरों(कासगंज)। भले ही अलग अलग राज्यों में कहीं लॉकडाउन है तो कहीं कोरोना कफ्र्यू, लेकिन तीर्थनगरी में अलग अलग राज्यों एवं गृह राज्य के तमाम लोग अपने दिवंगतों की अस्थि विसर्जन के लिए पहुंच रहे हैं। अप्रैल माह के अंतिम पखवाड़े से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं का दिवंगतों की अस्थियां लेकर पहुंचना शुरू हुआ। जो मई के पहले पखवाड़े तक लगातार बना रहा।
उसके बाद अब संख्या कुछ कम हुई है। आम तौर पर सामान्य मृत्यु और बीमारियों के चलते मृत्यु, घटना दुर्घटना में मृत्यु होने के कारण दिवंगतों की अस्थियां तीर्थनगरी में पहुंचती थीं, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस बार अस्थि विसर्जन का ग्राफ काफी बढ़ गया। तीर्थपुरोहितों की मानें तो काफी संख्या में लोग अस्थि विसर्जन के लिए तीर्थनगरी में पहुंचे।
तीर्थनगरी में करीब 700 तीर्थपुरोहित परिवार हैं जो अस्थि विसर्जन कराते हैं। अभी भी सामान्य से अधिक अस्थि विसर्जन हो रहे हैं। तीर्थपुरोहित बताते हैं कि इतनी संख्या में अस्थि विसर्जन के लिए पहले श्रद्धालु कभी नहीं पहुंचे। तीर्थपुरोहितों का कहना है कि राजस्थान में तमाम लोग परमिशन न मिलने के कारण अभी तीर्थनगरी नहीं पहुंच पाए हैं। जब वहां लॉकडाउन हटेगा, तब संख्या बढ़ेगी।
हरिद्वार की जगह सोरों पहुंचे श्रद्धालु
तीर्थनगरी के तीर्थपुरोहितों ने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या बढने का कारण यह भी रहा है कि हरिद्वार में प्रवेश करने के लिए श्रद्धालुओं को कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट ले जाना आवश्यक था, लेकिन सोरों में ऐसा नहीं था। जिसके चलते तमाम लोग अस्थि विसर्जन के लिए तीर्थनगरी पहुंचे। यहां कोई रिपोर्ट नहीं देखी जारही थी।
क्या कहते हैं तीर्थपुरोहित-
- हमारे यहां अलवर, मुरैना, धौलपुर क्षेत्र के श्रद्धालु पहुंचते हैं। पहले औसतन 25 श्रद्धालु हर माह आते थे, लेकिन मई माह में करीब 60 श्रद्धालु अपने दिवंगतों की अस्थि विसर्जन करने के लिए पहुंचे। पहले अस्थि विसर्जन के लिए पहुंचने श्रद्धालुओं की इतनी संख्या कभी नहीं हुई- पंडित भगवान प्रकाश मैंदावार।
- हमारे यहां बांदीकुई, महुआ क्षेत्र के श्रद्धालु पहुंचते हैं। जो दिवंगत परिजनों का अस्थि विसर्जन और श्राद्ध करते हैं। पहले से चार गुना अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचे हैं। पहले मई माह के पहले पखवाड़े में यह संख्या सर्वाधिक रही है। ऐसा महामारी के चलते हुआ है- प्रदीप भारद्वाज।
- इस बार जैसा हाल कभी नहीं देखा। अप्रैल, मई माह में अधिक लोगों की जान गई। जहां सामान्य रूप से तमाम लोग दिवंगत हुए वहीं कोरोना संक्रमण भी बड़ा कारण बना। चंबल संभाग के 50-60 श्रद्धालु प्रतिमाह आते थे। जिनकी संख्या बढ़ी है। अब तक दो सौ दिवंगतों का अस्थि विसर्जन करा चुके हैं- केशव देव वशिष्ठ।
- हमारे यहां राजस्थान, मध्यप्रदेश के श्रद्धालुओं के अलावा आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद इलाकों के श्रद्धालु भी अस्थि विसर्जन को पहुंचते हैं। इस बार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संख्या अधिक रही है। जो सामान्य आंकड़े से करीब 4 गुना है। पूर्व में ऐसा नहीं देखा गया। तीर्थपुरोहितों ने भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए अस्थि विसर्जन कराया है- रामेश्वर दयाल महेरे।