मैनपुरी। दीवानी न्यायालय में अब बिना सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस(सीओपी) नंबर के वकालतनामा स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जिन वकीलों के पास सीओपी नंबर नहीं होगा वह वकील दीवानी न्यायालयों के किसी भी मुकदमे में अपना वकालतनामा नहीं लगा सकेंगे।
जिला जज अनिल कुमार ने शुक्रवार को पीठासीन अधिकारियों को निर्देश जारी किए। इसमें कहा है कि न्यायालयों के पीठासीन अधिकारी, मुंसरिम, रीडर, लिपिक उन वकालतनामा को ही स्वीकार करेंगे। जिनमें संबंधित वकील के वकालतनामा पर उसका बार काउंसिल से जारी पंजीकरण संख्या व सीओपी नंबर अंकित होगा। अगर दोनों नंबर अंकित नहीं होंगे तो उन वकालतनामा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। वकालतनामा पर अंकित किए गए नंबरों की जांच करने के बाद ही वकालतनामा स्वीकार किए जांएगे। जिला जज द्वारा दिए गए निर्देश की एक प्रति बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी भेजी गई है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ यादव ने बताया कि जिला जज द्वारा दिए गए निर्देश के संबंध में सभी वकीलों को सूचना रजिस्टर व नोटिस बोर्ड के माध्यम से सूचना दे दी गई है।
बार काउंसिल ने की है पहल
वकालतनामा पर संबंधित वकील के पंजीकरण संख्या के साथ ही सीओपी नंबर अंकित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने पहल की है। बार एसोसिएशन के सचिव संतोष यादव राजू ने बताया कि इस संबंध में बार काउंसिल ने बार एसोसिएशन सहित जिला जज को भी पत्र भेजकर वकालतनामा पर पंजीकरण संख्या व सीओपी नंबर अंकित कराना अनिवार्य करने की मांग की थी।