स्कूल संचालक अभिभावकों से पैसे कमाने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहे हैं। आगरा में ऐसा ही मामला सामने आया, जहां कॉन्वेंट स्कूल ने फरमान जारी किया है कि प्राइवेट और एनसीईआरटी दोनों की किताबें खरीदनीं होंगी।
आगरा में अभिभावकों से पैसे कमाने के लिए स्कूल संचालक कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और कॉपी-किताब के नाम पर जमकर लूट मचा रखी है। आगरा के दयालबाग में स्थित एक नामी प्राइवेट स्कूल ने तो हद ही कर दी। प्राइवेट प्रकाशक की किताब के साथ एनसीईआरटी की किताबें भी खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य कर दिया है।
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अभिभावक जितेंद्र ने बताया कि उनका बेटा दसवीं कक्षा में है। स्कूल से किताब-कॉपियों की जो लिस्ट मिली है, उसमें एनसीईआरटी की चुनिंदा विषयों की सात किताबें शामिल हैं, जिनकी कीमत लगभग 1,100 रुपये है। वहीं इस लिस्ट में प्राइवेट प्रकाशक की 13 किताबें शामिल हैं जिनकी कीमत करीब 6,500 रुपए है। उनका कहना है कि जब उपरोक्त विषय की एनसीईआरटी की किताबें लिस्ट में शामिल हैं, तो प्राइवेट प्रकाशक की किताबों को खरीदने के लिए क्यों बाध्य किया जा रहा है।
पापा संस्था ने सीडीओ को दिया ज्ञापन
प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स अवेयरनेस केे राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन ने मुख्य विकास अधिकारी से मिलकर कहा कि जो किताबें बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त नहीं हैं, उन्हें स्कूलों मेंं क्यों प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने करीब 12 प्राइवेट स्कूलों की पुस्तकों की सूची उन्हें सौंपी। इस दौरान राजीव गुप्ता, सुमित सक्सेना, मोहित अग्रवाल आदि मौजूद रहे।