नेशनल हाईवे-2 को 6 लेन करने के साथ वाटर वर्क्स चौराहे पर नया पुल बनाने की शुरुआत हुई, लेकिन इसमें एएसआई ने आपत्ति लगाकर काम बंद करा दिया है। एएसआई ने निर्माणाधीन पुल के लिए पहले नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी से अनुमति लेने के लिए एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया) को कहा है। एएसआई ने न्यू आगरा थाने में एएसआई एक्ट के उल्लंघन पर एनएचएआई के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई है, जिसके बाद वाटरवर्क्स चौराहे पर पुल का काम बंद हो गया।
एएसआई एक्ट 2010 के मुताबिक, किसी भी स्मारक के 100 मीटर दायरे में निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। वाटर वर्क्स चौराहे पर हाईवे अथारिटी ने पुल का काम शुरू कर दिया, लेकिन यह यमुनापार रामबाग के और वाटरवर्क्स की ओर जफर खां मकबरे के 100 मीटर दायरे में है। एएसआई ने निर्माण रुकवाने के लिए न्यू आगरा थाने में एफआईआर भी दर्ज करा दी और पहले अनुमति मांगने को कहा। एनएचएआई अधिकारियों का तर्क था कि मंत्रालय और एएसआई के बीच पूर्व में समझौता हुआ है कि हाईवे के लिए स्मारक के नजदीक निर्माण की अनुमति दे दी जाएगी, लेकिन स्थानीय एएसआई अधिकारियों का कहना है कि यह अनुमति चौड़ीकरण के लिए है, न कि फ्लाई ओवर या फिर एलीवेटेड रोड के लिए। ऐसे में यह मामला अब नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी के पाले में पहुंच गया है। एनएमए की अनुमति के बाद ही एएसआई वाटर वर्क्स चौराहे पर पुल का काम शुरू करने देगा।
सिकंदरा पर एलीवेटेड रोड पर अड़ंगा
अकबर के मकबरे, सिकंदरा में नेशनल हाईवे अथारिटी ने एनएच-2 के चौड़ीकरण की जगह एलीवेटेड रोड बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन एएसआई ने एलीवेटेड रोड बनाने पर आपत्ति जता दी। दरअसल, सिकंदरा में अकबर के मकबरे के साथ कांच महल, लोधी मकबरा भी है। लोधी मकबरा एकदम रोड पर है और यहां 6 लेन भी नहीं बनाई जा सकती। अष्टकोणीय मकबरे का एक भाग रोड पर है। ऐसे में एलीवेटेड रोड बनने पर साइड लेन बनना मुश्किल होगा। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री डा. महेश शर्मा भी इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल चुके हैं। मंत्रालय के मुताबिक अगर सिकंदरा में अनुमति दी गई तो पूरे देश में सभी स्मारकों पर ऐसे ही अनुमति देनी होगी।