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Agra: भाई के प्रवेश पर उठाई आवाज तो दाखिला कर दिया रद्द, प्राचार्य बोले- छात्रों ने की अनुशासनहीनता और अभद्रता

Wed, 10 Dec 2025 04:39 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

छात्र ने बताया कि भाई के प्रवेश नहीं लेने पर विरोध हुआ और मैंने बात रखी तो मुझसे भी गहमा-गहमी की। कहा कि हमारी बातों को अनुशासनहीनता कहकर जतिन को एडमिशन देने से मना कर दिया और मेरा भी कैंसिल कर दिया। 
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आगरा कॉलेज Agra College - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आगरा कॉलेज की लॉ फैकल्टी में दलित छात्र के प्रवेश पर विवाद सामने आया है। कट ऑफ लिस्ट में नाम होने के बावजूद प्रवेश न मिलने का आरोप छात्रों ने लगाया है। आवाज उठाने पर उसके भाई का प्रवेश भी रद्द कर दिया गया। वहीं, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि अनुशासनहीनता और अभद्रता के चलते दोनों छात्रों का दाखिला रद्द हुआ है।
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सिकंदरा निवासी सचिन ने बताया कि एलएलबी की पहली काउंसलिंग 13 नवंबर को हुई थी। एससी कैटेगरी का कटऑफ 142.78 था और उसका प्रवेश हो गया था। वहीं, उसके भाई जतिन की मेरिट भी कट ऑफ से ऊपर थी। उसका नाम पहली मेरिट में था, लेकिन ईमेल न मिलने के कारण वह उसी दिन प्रवेश नहीं ले सका। इस पर जब विरोध हुआ और मैंने बात रखी तो मुझसे भी गहमा-गहमी की और हमारी बातों को अनुशासनहीनता कहकर जतिन को एडमिशन देने से मना कर दिया और मेरा भी कैंसिल कर दिया। 

छात्र का कहना है कि द्वितीय काउंसलिंग में नंबर दिखाने के बावजूद एडमिशन से मना कर दिया गया और उसके दस्तावेज फेंक दिए गए, जबकि उस दौरान ईमेल भी आ चुका था। 2 दिसंबर को मां के साथ जाने पर भी किसी ने बात नहीं सुनी और कहा कि अनुशासनहीनता और अभद्रता की है। उसी दौरान काउंसिलिंग से शिक्षिका का फोन भी चोरी हुआ था जिसपर हमको एफआईआर की धमकी दी जा रही है। सीसीटीवी में रिकॉर्डिंग हो तो हम भी देखना चाहेंगे। कॉलेज प्रशासन ने सभी आरोपों को खारिज किया है।
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प्राचार्य सीके गौतम ने बताया कि छात्र जतिन और उसके भाई सचिन ने पहली काउंसिलिंग के दिन ही शिक्षकों के साथ अभद्रता की। टेबल पर हाथ मारकर हंगामा किया, जिससे दो से तीन घंटे काम नहीं हुआ था। परीक्षा समिति ने अनुशासनहीनता को देखते हुए दोनों छात्रों को प्रवेश न देने का निर्णय लिया। छात्रों से प्रार्थना पत्र लिखने को कहा गया, पर उन्होंने धमकी भरे स्वर में व्यवहार किया और तत्काल प्रवेश पर अड़ गए। 2 दिसंबर को मां को साथ लाकर माफी मांगने की बात तथ्यहीन है। प्राचार्य ने दावा किया है कि पूरी प्रकरण की सीसीटीवी रिकॉडिंग देखी गई है इसके बाद ही निर्णय लिया गया है।
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