आगरा। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत बेसिक शिक्षा विभाग आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को अच्छे स्कूलों में प्रवेश कर दिलाता है। कई बच्चों के मामले में क्षेत्रीय वार्ड और किलोमीटर के नियम को दरकिनार कर प्रवेश कर दिए गए हैं। इस वजह से कई स्कूलों में हर रोज विवाद की स्थिति बन रही है।
बेसिक शिक्षा विभाग में आरटीई प्रवेश के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। अधिकारी दावे हजारों कर रहे हैं लेकिन जमीन पर सच्चाई अलग नजर आती है। इस बार कई बच्चों के प्रवेश वार्ड और किलोमीटर के नियम में फंस रहे हैं। अभिभावक फॉर्म भरते समय सबसे नजदीक स्कूलों के नाम भरते हैं और उसी हिसाब से प्रवेश भी मिलता है। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से कई बच्चों के प्रवेश एक किलोमीटर से दूर या दूसरे वार्ड के स्कूलों में कर दिए गए हैं। इस नियम पर प्रतिदिन किसी न किसी स्कूल में विवाद की स्थिति बन रही है। मंगलवार को शास्त्रीपुरम स्थित एक स्कूल में वार्ड नियम पर प्रिंसिपल और अभिभावक के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। किसी प्रकार से अन्य लोगों ने मामले को संभाला। ऐसी शिकायतें विभाग में भी हर रोज पहुंच रही हैं लेकिन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। विभाग की गलती से कई बच्चों के प्रवेश पर संकट बना हुआ है।
800 बच्चों को प्रवेश का इंतजार
जिले में 800 बच्चों को अब भी आरटीई के तहत प्रवेश का इंतजार बना हुआ है। इन बच्चों के लिए स्कूल निर्धारित नहीं किए गए हैं। जबकि 4,500 हजार बच्चों को स्कूल मिल चुके हैं। इनमें कई बच्चों का प्रवेश स्कूल और विभाग के बीच नियमों की वजह से फंसा हुआ है।
शिकायतों का कराया जा रहा समाधान
एक किलोमीटर से दूर या वार्ड बदलने के मामले सामने आ रहे हैं। वार्ड में खाली स्कूल में उन बच्चों का प्रवेश कराने का प्रयास करके शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। -जितेंद्र कुमार गोंड, बेसिक शिक्षा अधिकारी