कासगंज में बाढ़ और बारिश के बाद जिले में बुखार के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। लोग वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू की चपेट में आ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बुखार से पीड़ितों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इससे दवाओं की खपत भी बढ़ी है। जिले के दवा बाजार में एक करोड़ रुपये प्रतिदिन दवा की अतिरिक्त बिक्री हो रही है। बुखार से जुड़ी दवाओं और इंजेक्शन की खपत 4 गुना तक पहुंच गई है। वहीं सरकारी अस्पतालों व जिला चिकित्सालय में बुखार की दवाओं की खपत दोगुनी तक हो गई है।
बुखार पीड़ित तमाम मरीज आगरा, बरेली और अलीगढ़ के अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पताल, निजी चिकित्सालयों और देहात के चिकित्सकों के यहां भी मरीजों की भीड़ हो रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में चौपालों पर ग्रामीण चिकित्सक इलाज कर रहे हैं। रोग पर नियंत्रण न हो पाने से बाजार में मलेरिया और एंटीबायोटिक इंजेक्शन की खपत बढ़ गई है। फ्लूड की बोतल की खपत में भी इजाफा है। प्लेटलेट्स बढ़ाने की दवाओं की मांग भी बढ़ी है। पैरासीटामोल व एंटी एलर्जिक टेबलेट की खपत भी इन दिनों बढ़ी हुई है।
दवा विक्रेताओं के मुताबिक सामान्य दिनों के मुकाबले मौजूदा समय में 4 गुना तक खपत बढ़ी है। बाजार में इन दिनों दवाओं की सप्लाई धीमी है। इसके बावजूद उपलब्धता पर्याप्त । इनका कहना है कि आमतौर पर सामान्य दिनों में दवा बाजार में दो करोड़ रुपये का औसतन प्रतिदिन कारोबार होता है। इस समय कारोबार 3 करोड़ रुपये प्रतिदिन पर पहुंच गया है।
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जिला अस्पताल में जून के मुकाबले दोगुनी हुई दवाओं की खपत
जिला अस्पताल में जून माह के मुकाबले अगस्त और सितंबर माह में बुखार से जुड़ी आवश्यक दवाओं की खपत दोगुना से अधिक पहुंच गई है। जून माह में पैरासीटामोल की खपत 40000 टेबलेट की थी। यह अगस्त में 84000 टेबलेट हो गई। एंटीबायोटिक टेबलेट की खपत 31000 से बढ़कर 87000 हो गई। बीकासूल कैप्सूल की खपत 38000 टेबलेट थी। यह अगस्त माह में 70000 हो गई। सितंबर माह में खपत का आंकड़ा और ऊपर पहुंच सकता है। इसकी वजह प्रतिदिन जिला अस्पताल में 1500 से अधिक मरीज पहुंचना है।