उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा नीति 2022 लागू होने के बाद हर जिले की हर तहसील में जैव ऊर्जा उद्यम स्थापित किया जाएगा। सरकार की खाली पड़ी जमीनों पर कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट, बायो कोल प्लांट व बायो डीजल/बायो एथेनॉल प्लांट स्थापित किए जाएंगे। योगी सरकार निवेशकों को प्लांट लगाने के लिए केवल एक रुपये प्रति एकड़ वार्षिक टोकन लीज पर जमीन उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सरकार ने सभी जिलों में प्लांट लगाने के लिए आवेदन मांगे हैं। यूपीनेडा को अब तक 48 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी प्रवीण नाथ पांडेय ने बताया कि विभाग की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों को जैव ऊर्जा उद्यम स्थापित कराने के लिए जमीन तलाशने के निर्देश जारी किए गए हैं। जैव ऊर्जा संयंत्र की स्थापना के लिए दस एकड़ और दस टन क्षमता के सीबीजी प्लांट की स्थापना के लिए 25 एकड़ भूमि की जरूरत होगी। वहीं प्रतिदिन 100 टन उत्पादन क्षमता के बायो कोल प्लांट के लिए दो एकड़ और इतनी ही क्षमता के बायो डीजल और बायो एथनॉल प्लांट के लिए 1.5 एकड़ भूमि की जरूरत होगी। प्लांट लगाने के लिए एसडीएम के माध्यम से जल्द तहसीलों में खाली जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।
20 करोड़ सब्सिडी का प्रावधान
नई नीति की अवधि पांच वर्ष है। प्रदेश में स्थापित होने वाली जैव ऊर्जा परियोजनाओं को नीति/ योजना के अतिरिक्त उत्पादन पर इंसेंटिव दिया जाएगा। उद्यमों/ संयंत्रों की स्थापना तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और भंडारण के लिए 30 वर्षों की लीज अवधि के लिए भूमि एक रुपये प्रति एकड़ वार्षिक के टोकन लीज रेंट पर दी जाएगी। इसमें अधिकतम 20 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है। इससे खेतों में पराली जलाने की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
जैविक अपशिष्ट का निस्तारण वैज्ञानिक विधि से किया जा सकेगा। पराली प्रबंधन के साथ किसानों की आय बढ़ेगी। आगरा से भी चार आवेदन प्राप्त हुए हैं। निवेशकों के प्रस्ताव प्राप्त करने, भूमि आवंटन, विभिन्न एनओसी तथा अनुदान वितरण के लिए upnedabioenergy पोर्टल पर जानकारी मिल सकेगी, जबकि बायो ऊर्जा के संबंध में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आदि के लिए पोर्टल www.upneda.in पर किया जा सकेगा।