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UP: शहंशाह अकबर से हो रही मुकम्मल इश्क की फरियाद...मकबरे में दीवार पर इस तरह कुरेदे नाम, देखें तस्वीरें

Fri, 14 Feb 2025 09:58 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अखिलेश कुमार, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

शहंशाह अकबर को अबके युवा सलीम-अनारकली के इश्क के किस्से का बैरी नहीं मानते हैं। यह मकबरे की दीवारों पर लिखे प्रेमी-प्रेमिकाओं के नाम तस्दीक भी कर देते हैं। अपने वेलेंटाइन काे हमसफर बनाने की फरियाद में यहां तमाम नाम दर्ज हैं। पिछले तमाम वेलेंटाइन वीक की तरह इस बार भी मन्नत में यहां यही तरीका आजमाया गया।
 
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अकबर का मकबरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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वेलेंटाइन वीक में अकबर के मकबरे का परिसर रुहानी और रूमानी होने लगता है। इस बृहस्पतिवार को भी यहां युवा जोड़ों की मौजूदगी रही। अकबर की कब्र पर सजदा किया गया। मुकम्मल और महफूज इश्क की मुराद मांगी गई। इसी चाहत में दीवार पर अपने-अपने नाम दर्ज कर दिए। यह सिलसिला पहले दिन से है। मुख्य मकबरे के आसपास ही नहीं यहां तकरीबन हर दीवार पर प्रेम करने वालों की अपने जोड़े के साथ मौजूदगी है। इनमें नए नामों का हर साल इजाफा हो रहा है।
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अकबर का मकबरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रेम करने वाले अकबर के सुलह-ए-कुल से खासा इत्तेफाक रखते हैं। यहां रफत के साथ कल्पना हैं तो नाज के साथ राहुल का नाम जुड़ा है। इस तरह के तमाम जोड़े हैं। यहां मिली रफत बताती हैं कि मकबरे की दीवारों पर नाम लिखना अब रवायत हो गई है। अकबर में कुछ तो तासीर होगी ही।
 

अकबर का मकबरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
...प्रेम इस अपराध की इजाजत नहीं देता
अकबर का मकबरा भारतीय पुरातत्व से संरक्षित है। इसे क्षति पहुंचाना अपराध है। ...और प्रेम किसी भी तरह के अपराध की इजाजत नहीं देता है। प्रेमी जोड़ों के नाम लिखने से यहां कई जगह गहरे निशान पड़ गए हैं। निगरानी तंत्र मजबूत न होने से दीवारों को लगातार नुकसान हो रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मुख्य मकबरे में महज एक तख्ती लटका रखी है। इसमें कार्रवाई के बाबत कुछ भी दर्ज नहीं है। स्मारक को न खरोंचने के लिए आभार भर जताया गया है।

 
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अकबर का मकबरा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मजिस्ट्रेट को जुर्माने का अधिकार
संरक्षित स्मारकों की दीवारों को खुरचने या नुकसान पहुंचाने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का वर्ष 2010 में नया एक्ट स्पष्ट नहीं है। इसमें ऐसे मामलों में कार्रवाई का अधिकार मजिस्ट्रेट को दिया है। एएसआई कर्मचारी केवल थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उसके बाद यह मामला मजिस्ट्रेट के पास जाएगा, जहां कितना जुर्माना लगाना है, यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है। पुराने एक्ट में यह 5 रुपये से 500 रुपये के बीच लगाया जा सकता था। नए एक्ट में जुर्माने की रकम तय नहीं की गई है। एएसआई के पास जुर्माने या दंड देने का अधिकार नहीं है।
 
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