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गजब कर डाला: 10 हजार रुपये का एक पाम का पेड़, इसलिए 45 उखाड़ फेंके; विकास के नाम पर हरियाली का 'कत्ल'

Fri, 24 Jul 2026 09:45 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में सीएम ग्रिड परियोजना के दौरान डिवाइडर से 45 पाम के पेड़ बिना अनुमति उखाड़ने का मामला सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी तक पहुंच गया है। पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया है कि ट्रांसलोकेशन की मंजूरी लिए बिना पेड़ों को नष्ट किया गया, जबकि प्रत्येक पेड़ की कीमत करीब 10 हजार रुपये थी।
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पाम के पेड़ उखाड़ फेंके - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में सीएम ग्रिड योजना में दिल्ली गेट से हरीपर्वत के बीच बनाई जा रही सड़क में डिवाइडर पर लगे पाम के 45 पेड़ों का कत्ल करने के मामले में सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी से शिकायत की गई है। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने वन विभाग, ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी और सीईसी से शिकायत में कहा है कि अनुमति लेने की जगह शहर के अंदर पेड़ों को काटने, नष्ट करने का सिलसिला जारी है। उन्होंने सीईसी से जल्द निरीक्षण कर पेड़ काटने की आरोपी संस्था पर कार्रवाई की मांग की है।
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दस दिन पहले सीएम ग्रिड के काम में दिल्ली गेट पर सरकार नर्सिंग होम के सामने लगे 100 साल पुराने पीपल के पेड़ को भी बिना अनुमति के काट दिया गया था। इसी तरह डिवाइडर पर लगे पाम के 45 पेड़ों को सूखा बताकर उखाड़ दिया गया, जबकि काम शुरू होने से पहले की तस्वीरों में यह हरे-भरे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से सीएसआर के तहत पेड़ लगाए गए थे। तब इनकी कीमत 10 हजार रुपये थी। हरीपर्वत से दिल्ली गेट के बीच 10 फीट ऊंचे इन पेड़ों के साथ शोभाकार पौधे लगाकर डिवाइडर पर हरियाली की गई थी।

 

पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि पीपल के पेड़ के बाद नगर निगम ने सीएम ग्रिड में पाम के पेड़ भी उखाड़ दिए। सीईसी से अनुमति लेने की जगह पेड़ों को नष्ट किया गया है। सीईसी से शिकायत की है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाए जो ऐसे लापरवाह अधिकारियों और विभागों के लिए नजीर बने।

 

नगर निगम को अनुमति लेनी चाहिए
डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि पीपल के पेड़ के मामले में विभाग प्राथमिकी दर्ज करा चुका है, जबकि पाम के पेड़ों के लिए कोई अनुमति हटाने या ट्रांसलोकेट करने के लिए नहीं मांगी गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत टीटीजेड में यह अनिवार्य है। मेरठ नगर निगम ने सीएम ग्रिड में बाधा बने पेड़ों को काटने की अनुमति ली है, ऐसे में आगरा नगर निगम को भी अनुमति लेनी चाहिए थी। 

 

पाम के पेड़ों को सूखा बताया था
सहायक नगर आयुक्त सरिता सिंह ने बताया कि सीएम ग्रिड का काम शुरू होने से पहले जूनियर इंजीनियर ने अपनी रिपोर्ट में पाम के पेड़ों को सूखा बताया था। डिवाइडर पर बाकी पौधे शोभाकार लगे थे, जिन्हें शिफ्ट किया गया। निर्माण विभाग को पेड़ों के मामले में अनुमति लेनी चाहिए थी। 

 
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29 को आगरा आएंगे सीईसी सदस्य
आगरा मेट्रो की ओर से एमजी रोड के पेड़ काटने के लिए किए गए आवेदन पर जांच करने के लिए सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की टीम 29 जुलाई को आगरा आ रही है। हरीपर्वत से भगवान टॉकीज के बीच एमजी रोड पर डिवाइडर पर लगे पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई है। पूर्व में प्रतापपुरा से हरीपर्वत के बीच मेट्रो ने डिवाइडर पर लगे पेड़ काट दिए थे, जिसकी शिकायत सीईसी से की गई थी।
 
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