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Agra News: ऐसे समझें पुलिस कमिश्नरेट का पूरा सिस्टम,  शक्तियां, अधिकार और कितने होंगे पुलिस अधिकारी

Sat, 26 Nov 2022 03:54 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

इस प्रणाली में दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कुछ मामलों में अंतिम फैसला लेने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिया जाता है। जैसे- सीआरपीसी की धारा 107-116, 144 आदि। सीआरपीसी की धारा 20 के तहत इन्हें दंडाधिकार की शक्तियां प्राप्त हैं।
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पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद आगरा पुलिस और ताकतवर हो जाएगी। इसके तहत पुलिस और कानून व्यवस्था की सारी शक्तियां पुलिस कमिश्नर में निहित होती है। पुलिस कमिश्नर एकीकृत पुलिस कमान का प्रमुख होता है। यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने एवं अपने निर्णय के लिए राज्य सरकार के प्रति उत्तरदायी होता है। इस प्रणाली में दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कुछ मामलों में अंतिम फैसला लेने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को दिया जाता है। जैसे- सीआरपीसी की धारा 107-116, 144 आदि। सीआरपीसी की धारा 20 के तहत इन्हें दंडाधिकार की शक्तियां प्राप्त हैं। क्षेत्र के किसी भी भाग में किसी भी प्रकार के आयोजन (सांस्कृतिक कार्यक्रम, कॉन्सर्ट, विरोध प्रदर्शन, धरना आदि) की अनुमति देने या न देने का अधिकार होता है। इसके साथ ही विशेष परिस्थितियों में बल प्रयोग और संवेदनशील मामलों में रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या गैंगस्टर एक्ट के तहत विभिन्न धाराओं का प्रयोग करने के लिए पुलिस कमिश्नर का आदेश सर्वमान्य होता है।

पुलिस कमिश्नरेट से क्या मिलेगा

- पुलिस बल में बढ़ोतरी : कमिश्नरेट लागू होने के बाद पुलिस बल में बढ़ोतरी होगी।
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- बेहतर संसाधन :  चार पहिया और दोपहिया वाहन से लेकर कार्यालय कार्य के लिए कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ेगी।
- महिला सेल की स्थापना: कमिश्नरेट बनने के बाद महिला सुरक्षा के लिए एक डेडिकेटेड पुलिस की टीम बन सकेगी।
- पुलिस की ट्रेनिंग: कमिश्नरेट में हर महीने अलग-अलग विषयों पर ट्रेनिंग या सेमिनार का आयोजन किया जाता है।
- मजिस्ट्रेट पॉवर: कमिश्नरेट बनने के बाद नोएडा पुलिस को कानून व्यवस्था को लेकर हर तरह से फैसला लेना अधिकार होगा।
 

पुलिस को मिलेंगे ये अधिकार

- उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970
- विष अधिनियम 1919 के विधिक अधिकार
- अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के विधिक अधिकार
- पुलिस (द्रोह-उद्दीपन) अधिनियम, 1922 के विधिक अधिकार।
- पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के विधिक अधिकार।
- विस्फोटक अधिनियम 1884 के विधिक अधिकार।
- कारागार अधिनियम 1894 के विधिक अधिकार।
- सरकारी गोपनीयता अधिनियम 1923 के विधिक अधिकार।
- विदेशी अधिनियम 1946 के विधिक अधिकार।
- गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के विधिक अधिकार।
- भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम 1944 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण एवं अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005 के विधिक अधिकार।
- उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के विधिक अधिकार।

यह होंगे पद

1 पुलिस कमिश्नर (आईजी या उससे ऊपर रैंक का अधिकारी)
1 अपर पुलिस कमिश्नर (एसएसपी या डीआईजी रैंक का अधिकारी)
3 डिप्टी पुलिस कमिश्नर (एसपी रैंक का अधिकारी)
3 अपर डिप्टी पुलिस कमिश्नर (अपर पुलिस अधीक्षक रैंक का अधिकारी)
22 असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (पुलिस उपाधीक्षक रैंक का अधिकारी)

मिलेंगी मजिस्ट्रेट की शक्तियां

असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर, अपर डिप्टी पुलिस कमिश्नर, डिप्टी पुलिस कमिश्नर, अपर पुलिस कमिश्नर, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त होंगे। अपर पुलिस कमिश्नर, ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर को अपर जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा।
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