मैनपुरी। जिला पंचायत के टेंडरों में कमीशनखोरी की शिकायत की जांच शुरू हो गई है। शुक्रवार को तीन सदस्यीय समिति ने अभिलेख देखने के साथ ही जिला पंचायत के अधिकारी और कर्मचारियों से भी सवाल जवाब किए। हालांकि टीम ने अभी निष्कर्ष पर न पहुंचने की बात कही है।
दो दिन पहले जिला पंचायत के टेंडरों में कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी से शिकायत हुई थी। मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को मामले की जांच सौंपी थी। मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा ने जांच समिति में मुख्य कोषाधिकारी श्यामलाल जायसवाल और अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग अनिल कुमार को भी शामिल किया है। समिति ने शुक्रवार को पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। विकास भवन स्थित कार्यालय में जिला पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी अभिलेख लेकर पहुंचे।
कई घंटों तक टीम ने अभिलेखों को बारीकी से जांचा।
सूत्रों के अनुसार टीम ने अभी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए समय मांगा है। तब तक टेंडर प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक रहेगी। इस मामले में जिला पंचायत कार्यालय में खलबली मची हुई है।
अपर मुख्य अधिकारी व अन्य से किए सवाल जवाब
मुख्य विकास अधिकारी नगेंद्र शर्मा व समिति के अन्य सदस्यों के सामने शुक्रवार को अपर मुख्य अधिकारी तपेश चंद्र वर्मा, अवर अभियंता व लेखाकार आदि उपस्थित हुए थे। करीब एक घंटे तक समिति ने उनसे टेंडर के संबंध में सवाल जवाब किया। सभी ने अपने बयान दर्ज कराए। इसके बाद समिति ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी।
समिति ने जांच शुरू कर दी है। जिला पंचायत से सभी अभिलेख ले लिए गए हैं, साथ ही अधिकारी व कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। अभी समिति किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है, इसके लिए और समय लगेगा।
नगेंद्र शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी।