झोलाछाप और आशाओं के गठजोड़ से सरकारी अस्पतालों में प्रसव घट गए हैं। कमीशन के लिए गर्भवती महिलाओं को निजी और झोलाछाप के यहां भेज रही हैं। इसके चलते बीते साल के मुकाबले करीब 40 फीसदी कम प्रसव हुए हैं। इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
आगरा में 18 सामुदायिक, 48 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें औसतन हर महीने 4400 प्रसव होते हैं। इस साल सरकारी अस्पतालों में प्रसव में बेहद गिरावट आई है। इस साल हर महीने औसतन 2600 प्रसव रह गए हैं। सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में कमी आई है। बीते साल हर महीने 3 हजार से अधिक प्रसव हुए थे, जो अब घटकर करीब 2200 रह गए हैं। शहरी आंकड़ों में बीते साल 14745 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हुए और इस बार ये संख्या 9352 रह गई है। गिरते आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट बनाई है।
रॉयल हॉस्पिटल में आशाओं को बांटे थे उपहार
आशाएं कमीशन के लिए निजी अस्पताल और झोलाछाप के यहां प्रसव कराते हुए पकड़ी गई हैं। बीते साल 9 दिसंबर को यमुनापार के रॉयल हॉस्पिटल में आशाओं को उपहार बांटने का वीडियो वायरल हुआ था। सीएमओ ने छापा मारा और 17 आशाओं की सूची मिली। अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर आशाओं पर एफआईआर कराई।
झोलाछाप का मिला प्रसव कक्ष
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीते सप्ताह 11 झोलाछाप के यहां छापा मारा। यहां अवैध रूप से प्रसव करा रहे थे। इनके यहां से प्रसव के उपकरण, दवाएं और अन्य सामान भी जब्त किया। इनके संचालकों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया है। एंबुलेंस चालकों की सांठगांठ के चलते भी निजी अस्पतालों में प्रसव कराए गए हैं।
आशाएं की जा रही चिह्नित
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव में बीते साल के मुकाबले करीब 40 फीसदी कमी आई है। कमीशन के लिए ऐसा कर रहीं आशाओं को चिह्नित किया जा रहा है। झोलाछाप पर छापे मारकर एफआईआर भी करा रहे हैं।
लिप्त अस्पताल संचालकों का समर्थन नहीं
आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनूप दीक्षित का कहना है कि आशाओं से सांठगांठ कर निजी अस्पताल में प्रसव का आईएमए समर्थन नहीं करता है। ये जरूरतमंद मरीज का शोषण भी है। ऐसे मामलों में विभाग दोषियों और झोलाछापों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
पांच साल का ये है रिकाॅर्ड:
प्रकार 2020-21 2021-22 2022-23 2023-24 2024-25
शहरी 11220 10602 11509 14745 9352
ग्रामीण 38734 41310 40744 38229 22235
कुल 49954 51912 52253 52974 31587