आगरा। गुड़ की मंडी स्थित सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर फर्जी एनओसी हासिल कर व्यावसायिक इमारत तानने के मामले में प्रशासन से ज्यादा आगरा विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों और बाबुओं की मिलीभगत रही थी। फर्जी एनओसी से सरकारी जमीन पर कब्जे के मामले की जांच करने वाली कमेटी ने इंजीनियरों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
माना है कि बाबुओं ने बिल्डर से मिलीभगत कर आवेदन को स्वीकार किया और नजूल विभाग से बाद में मिली सरकारी जमीन होने से संबंधित चिट्ठी को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। इसके बाद जब अवैध कब्जे वाली जमीन पर नक्शे के अनुरूप रिहायशी भवन की बजाय व्यावसायिक निर्माण हुआ तो सर्वे करने गए इंजीनियरों ने भी आंखें मूंद ली। खास बात यह है कि सर्वे में इंजीनियर को जीपीएस टैगिंग वाले फोटो तक लगानी होती है। इसके बावजूद व्यावसायिक निर्माण को कागजों में रिहायशी दिखाकर हरी झंडी दे दी गई।
अमर उजाला के सरकारी जमीन पर फर्जी दस्तावेज से अवैध कब्जे और निर्माण का खुलासा करने के बाद अब प्रशासन और एडीए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की तैयारी में जुटा है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि निर्माणकर्ता को भवन खुद गिराने या खाली करने के लिए कहा गया है। पंद्रह दिन पूरे होने के बाद बुलडोजर से अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा।
एनओसी कौन से सही, जांच अधर में
प्रकरण में जिस एनओसी को बिल्डर मालती शर्मा की ओर से नक्शा मंजूरी के समय अपलोड किया गया, वह सही है या गलत। यह एक अनसुलझी गुत्थी बन गया है। सूत्रों के अनुसार बिल्डर मालती ने अफसरों के सामने दावा किया है कि उन्हें यह एनओसी तहसील से प्राप्त हुई। वहीं, नजूल विभाग के अफसरों की भेजी चिट्ठी में जमीन सरकारी आस्थान के रूप में दर्ज दर्शाई गई है। बिल्डर के दावे के बाद अब प्रशासन और एडीए पर तहसील और एडीए के अफसरों-कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है।